हमें चाहिए गाँधी के सपनों का भारत



देवघर -गांधी जयंती के अवसर पर स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल में बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया।भाषण प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई जिसका विषय "गांधी जी का पर्यावरण प्रेम" पर बोलते हुए सुमैय्या ने बतलाया कि गांधी जी किसी के ऊपर अपने विचारों को थोपते नहीं थे।उनका जीवन दर्शन सत्य और अहिंसा पर आधारित था। अहिंसा से उनका तात्पर्य सभी जीवों से प्रेम और संसाधनों पर सभी का समान अधिकार को परिभाषित करता है। राखी कुमारी ने अपने विचारों से अवगत कराते हुए कहा कि गांधी जी के द्वारा रचित पुस्तक "हिन्द स्वराज " से हमे ज्ञात होता है कि गांधी जी का समस्त जीवन पर्यावरण प्रेम पर आधारित है। 

ज्योति कुमारी ने गांधी जी के सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय विचार धारा  को आत्मसात करने की आवश्यकता को बतलाया। कनीय वर्ग में भाषण का विषय" गांधी के सपनो का भारत "पर मेहुल ने बताया कि गांधी की कल्पना ऐसे भारत की थी जहाँ संसाधनों का समान वितरण हो अर्थात लोग किसी भी कार्य को करें लेकिन उनमें अमीरी गरीबी का फर्क न हो। अर्पिता ने बताया कि गांधी के लोकतंत्र में सभी को शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और भोजन की कल्पना थी। प्रज्ञा दुबे ने अशिक्षा, छुआछूत को सबसे बड़ा अभिशाप बतलाया और गांधी जी जीवन पर्यंत इन्ही चीजों से संघर्ष करते रहे।  

निर्णायकों में देवेश पांडेय,अमित मिश्रा, दिलीप पांडेय व संजय कुमार झा थे। अपने संबोधन में उन्होंने खुशी जाहिर की औऱ बालिकाओं की अधिक संख्या में भागीदारिता स्वागत योग्य बतलाया। कार्यक्रम का संचालन रवि सहाय ने किया।गांधी जयंती के पूर्व दिवस पर छात्रों व शिक्षकों के द्वारा गांधी जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य ने गांधी जी के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि मोहन दास से महात्मा बनने के लिए उन्होंने एक लंबी यात्रा की जो उनके जीवन दर्शन का अध्ययन करने से ज्ञात होता है। गांधी जी सर्वधर्म समभाव और अहिंसा के पुजारी थे। वे पश्चिमी विकास अवधारणा के प्रबल विरोधी थे। आइए आज हम सब उनके बताए हुए मार्ग पर चलने का प्रयास करें और देश से अशिक्षा को दूर करने के लिए कृत संकल्पित रहें।

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