उर्दू जुबान की बदहाली और गिरते उर्दू अदब की मैयारी का जिम्मेदार खुद उर्दू दां है हिंद के मशहूर मजाहीया शायर-व- आर्टिस्ट, बैंजो मास्टर महफूज अंसारी ने संवाददाता से एक छोटी सी मुलाकात मैं कहा



महफूज अंसारी अपने दौर के ऐसे तंज व मजाहीया शायर थे जिसकी तोती पूरे हिंदुस्तान में बोलती थी महफूज साहब का जब  भी महफिल मैं आने की आहट होती थी तो लोग इन्हें सुनने के लिए उमड पढ़ते थे महफूज साहब सिर्फ शायर ही नहीं थे एक अच्छे आर्टिस्ट भी थे और बैंजो मास्टर भी जिन्होंने हिंदुस्तान के बड़े-बड़े कलाकारों  और कवालों के साथ अपने बेंजू के हुनर का जलवा दिखाया जैसे गुलाम आजाद, मजीद भारती, सुभान प्रेमी, सलीम ताज, मुंबई के मशहूर कव्वाला  कैसर बानो ,अजीज नाजा, जानी बाबू, युसूफ आजाद, बनारस के शबनम कव्वाला, के साथ अपना मंच साझा किया है इसके अलावा पाकिस्तान के मशहूर गजलगो गुलाम अली, मेहंदी हसन, को भी धून तैयार कर दिया करते थे महफूज साहब सितार के माहीर थे साथ में गजल भी गाते थे मैं महफूज साहब से कई लोगों ने सितार बजाने का स्टाइल भी सीखें इन्हें कई फिल्मों में बैंजो बजाने का ऑफर मिला मगर घरेलू परेशानी की वजह कर वह बंगाल के आसनसोल वापस आ गए महफूज साहब अपने कला का डंका सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं गैर मुल्कों में भी अपना लोहा मनवाया है!

 महफूज साहब मोहम्मद रफी साहब के आसनसोल के एक प्रोग्राम में मंच साझा करने का मौका मिला  महफूज साहब का बैंजो बजाने का स्टाइल रफी साहब को इतना भाया कि वह महफूज साहब को अपने साथ मुंबई चलने को कहा मगर महफूज साहब आसनसोल रेलवे डिवीजन में रेल ड्राइवर के पद पर  रहने के कारण और घरेलू परेशानी के कारण वह साथ जाने से इंकार कर दिए अभी महफूज साहब रिटायर कर अपने घर में कयाम कर रहा है महफूज साहब 1941 ईस्वी में आसनसोल कुरेशी मोहल्ला में जन्म लिए अभी वह 85 वर्ष के हो गए हैं महफूज साहब की अहलिया के साथ तीन बेटे हैदर इमाम ,डॉक्टर नजर इमाम, और हसन इमाम ,तीन बेटियां इशरत तबस्सुम, कहकशा तबस्सुम, और वाजिदा तबस्सुम ,सभी हयात मैं है और सभी शादीशुदा है आसनसोल मैं उनके आवास कुरैशी मोहल्ला .आसनसोल में एक छोटी सी मुलाकात "जर्नलिस्ट अरशद मधुपुरी" से हुई इस मुलाकात में उन्होंने अपने गुफ्तगू के दौरान उर्दू जबान और उर्दू अदब की गिरती मयारी पर कहा आज उर्दू अदब और उर्दू जुबान की बदहाली और उर्दू अदब के गिरते मयार  का जिम्मेदार खुद उर्दू दां है इसका जिम्मेदार उर्दू पढ़ने लिखने वाले सब है उर्दू अखबार और रसायल और शायर अदब्बा भी है क्योंकि यह सब कारइन को आला अदब ना दे कर इनके गिरते हुए मजाक के मुताबिक अदब देकर सस्ती शोहरत और मकबूलयत हासिल करना चाहता है इसे बरकरार और उर्दू मयार को ऊंचा बनाए रखने के लिए फनकारों को चाहिए कि वह अपनी अदबी जिम्मेदारी ईमानदारी के साथ निभाए उन्होंने कहा हमारा मुल्क मैं उर्दू की पोजीशन यह है कि उर्दू की खिदमत एक तिजारत हो गई है उर्दू अखबार छापने वाले सिर्फ सहा सहाफीयू  से मुफ्त में काम करवाते हैं और अखबार किस सरकुलेशन नहीं करते सिर्फ विज्ञापन के लिए अखबार चलाते हैं उर्दू अखबार लोगों तक नहीं पहुंच पाती यही वजह है कि लोग हिंदी अखबार को बढ़ावा देने लगे जिसके वजह कर उर्दू अखबार खोलो पढ़ना छोड़ दिए क्योंकि हिंदी अखबार एक एक लोगों तक आसानी से पहुंच जाते हैं मैं अपील करता हूं कि उर्दू अखबार खरीदें और पढ़ें तभी हम उर्दू जबान और उर्दू अदब को जिंदा और महफूज रख सकते हैं उन्होंने कहा अब हमारी उम्र काफी हो गई किसी दिन अल्लाह के प्यारे हो जाएंगे मैं उर्दू का और उर्दू की खिदमत करने वाले से अपील करता हूं कि उर्दू जुबान को बचाएं और अपने बच्चों को उर्दू अदब से जुड़े

कोई टिप्पणी नहीं