टिनी टॉट्स डे नृत्य प्रतियोगिता के ग्रुप डी का परिणाम घोषित



देवघर  : केरला एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी तथा ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के युग्म बैनर तले टिनी टॉट्स डे ऑनलाइन नृत्य प्रतियोगिता के ग्रुप डी के विजयी प्रतिभागियों की सूची की घोषणा की गई। विजयी प्रतिभागियों की सूचना जारी करते हुए केरला सोसाइटी के सचिव डॉ. जय चन्द्र राज ने जानकारी दी कि ग्रुप डी में रूड़की कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, उत्तराखंड की छात्रा श्रुति श्री को प्रथम, देवसंघ नेशनल स्कूल की छात्रा अस्मिता हालदार को द्वितीय जबकि शिव विहार कॉलोनी निवासी रितु कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इनके अलावे पश्चिम बंगाल की रागिनी चक्रबर्ती, हिमानी मण्डल, देवयानी गांगुली, बिहार के मनोरंजन कुमार, रंजन सिंह, मिस्टी प्रिया, गुजरात की राधा यादव को सांत्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। सभी विजयी प्रतिभागियों को 26 सितम्बर को ऑफिसर कॉलोनी स्थित संत माइकल एंग्लो विद्यालय में पुरस्कृत किया गया।  झारखंड की नृत्यकला के सम्बंध में डॉ. जे.सी. राज ने कहा- झारखण्ड में प्राय : जितने प्रकार के नृत्य है, उतने ही प्रकार के लय, ताल एवं राग भी हैं । इसी से यहाँ की नृत्य मुद्राओं की शैली के अनुरूप उनके रागों के नाम हैं, यहीं इनको नैसर्गिकता और समरूपता है। झारखंडी समाज में नृत्य को खेलना, खेइल, खैलैक भी कहा जाता है। 'अखरा खैलेक' अर्थात् अखरा में नाचना, 'डमकच खेलइया के' तात्पर्य डमकच नाचने वाले कौ, जैसे प्रयोग चलते है। झारखंडी नृत्य का स्वरूप मौसम व ऋतुचक्र के अनुक्रम में परिवर्तित होता रहता है। अवसर विशेष के उपलक्ष में भी नृत्य आयोजित होते हैं, जैसे-फगुआ नाच, मंडा नृत्य, भगतिया है नाच, सोहराई नृत्य, दासाईं नाच, सरहुल नृत्य, करमा नाच,जतरानृत्य, नागे नाच आदि। झारखण्ड के अधिकांश नृत्य, भक्ति, श्रृंगार, करुण, चीर,शति रस के होते है, तो कुछ नृत्य युद्ध, शिकार, कृषि व जीवन से संबंधित विविध प्रकृति कै। इनके नृत्य संगीत में जीवन के कटु-मधु अनुभूतियों की अभिव्यक्तियों की प्रधानता रहती है। झारखण्ड के आदिम लोक नृत्य, प्राचीनता, कलाप्रियता, रसकिंता एवं सौदर्य बोध की अप्रतिम कलाभीव्यक्ति है। ये हमें अपने पुरखों से मिली, अमूल्य जीवनदायिनी संजीवनी उपहार है। ये झारखण्डी आदिम नृत्य झारखण्ड को अस्मिता के गौरव गान हैं, झारखण्ड की पहचान और शान है।

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