राहुल अध्ययन केंद्र में मुक्तिबोध व महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया!



मधुपुर राहुल अध्ययन केन्द्र मे मुक्तिबोध व महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हे याद किया गया । इस अवसर पर दोनो विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया । मौके पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव कलमकार धनंजय प्रसाद ने विस्तार पूर्व चर्चा करते हुये कहा कि गजानंदन माघव मुक्तिबोध की कृतियां आज भी प्रासंगिक है । उन्होनें .अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज , संस्कृति व व्यवस्था पर तीखा टिप्पणी करते रहते थे । वे अपनी लेखनी को सामाजिक उत्थान का जरिया बनाये । यह उनके लिए आत्मसंघर्ष का काम ही सामाजिक संघर्ष का जरिया था । पूंजीवाद व साम्राज्यवादी व्यवस्था पर मुक्तिबोध ने जितना प्रहार अपनी रचनाओं से किये उतना शायद ही किसी अन्य भाषाओ की रचनाओ मेँ की गई हो । उनकी कविता रोमानी होते हुये भी अत्याधिक यथार्थवादी और आधुनिक है । आधुनिक युग की कविताओं मे सर्वोंपरि है । उनकी प्रमुख रचनाएं - चाँद का मुँह टेडा , भुरी भुरी खाक , सतह से उठता आदमी व मुक्तिबोध रचनावली आदि है । उन्होने कहा कि महादेवी वर्मा छायावाद काल के एक स्तंभ थी । उन्होनें लेखन मे एक नया मुकाम बनाई । इसके अलावे अन्य लोगों ने आंनलाइन अपने विचार व्यक्त किये!

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