प्रशांत सिन्हा को हिन्दी के पुरोधा राजेन्द्र जी की तस्वीर समर्पित



देवघर  : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले आयोजित हिन्दी दिवस समारोह के अवसर पर अपने शहर के कलम के जादूगर प्रशांत कुमार सिन्हा को हिन्दी के पुरोधा राजेन्द्र सिन्हा की तस्वीर विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव के करकमलों से समर्पित की गई। प्रशान्त जी देवघर के बम्पास टाउन में वर्षों से रह रहे हैं। उनकी लेखनी देश के कई नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में एक लंबी अवधि तक प्रकाशित होती रही। इस उम्र में भी वे सोशल मीडिया में काफी क्रियाशील हैं। सन 2018 में दीघा, पश्चिम बंगाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार समारोह में सम्मानित प्रशान्त जी काफी सरल, मृदुभाषी एवं कर्तव्यपरायण व्यक्ति हैं। मौके पर देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी ने हिन्दी दिवस के संदर्भ में कहा- हिन्दी दिवस का इतिहास और इसे दिवस के रूप में मनाने का कारण बहुत पुराना है। वर्ष 1918 में सृजन पति तिवारी ने इसे जनमानस की भाषा कहा था और इसे देश की राष्ट्रभाषा भी बनाने को कहा था। बड्स पैराडाइस स्कूल, चकाई के प्राचार्य समीर कुमार दूबे ने कहा- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त,रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास और व्यौहार राजेन्द्र सिंह आदि लोगों ने बहुत से प्रयास किए। जिसके चलते इन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएँ भी की। एस.के.पी. विद्या विहार के सचिव डॉ. उमाकांत सिंह ने कहा- हिन्दी दिवस की शुरुआत अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है।आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। डॉ. प्रदीप देव ने कहा- दरअसल 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए। इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं और लोगों को मनाया। गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल की छात्रा आराध्या प्रिया ने कहा- 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ साथ राजभाषा नीति भी लागू हुई। संविधान के अनुच्छेद 343,एक के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि भारत की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप है। देवघर महाविद्यालय की 

छात्रा निकिता सिंह राजपूत ने कहा- 26 जनवरी 1965 को संसद में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि हिन्दी का सभी सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाएगा, लेकिन उसके साथ साथ अंग्रेज़ी का भी सह राजभाषा के रूप में उपयोग किया जाएगा। वर्ष 1967 में संसद में भाषा संशोधन विधेयक लाया गया। राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति की छात्रा आयुषी अन्या ने कहा- वर्ष 1990 में प्रकाशित एक पुस्तक "राष्ट्रभाषा का सवाल" में शैलेश मटियानी जी ने यह सवाल किया था कि हम 14 सितम्बर को ही हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं। इस पर प्रेमनारायण शुक्ला जी ने हिन्दी दिवस के दिन इलाहाबाद में इसके कारण को बताया था कि इस दिन ही हिन्दी भाषा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इस कारण इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।

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