जमुआ में फॉउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी की बैठक संपन्न।



जमुआ। हमारे देश की सरकारी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली पर विगत एक दशकों से भी अधिक समय से प्रश्न चिन्ह उठाए जाते रहे हैं। प्रथम संस्था और असर की सालाना रिपोर्टें अपने अध्ययन और आंकड़ों के आधार पर यह स्थापित करती रही हैं कि किसी विशेष दर्जे में पढ़ रहा बच्चा अपनी वर्तमान कक्षा के एक या दो स्तर निचली कक्षा की विषय वस्तु को भी समझ के साथ पढ़ने, अभिव्यक्त करने के बुनियादी कौशल को प्राप्त नहीं कर सका है, और यही बात गणित विषय की बुनियादी दक्षताओं के बारे में भी सही है। मौजूदा सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत इसको गंभीरता से ली है। अब पांच नहीं, बल्कि तीन साल से ही बच्चों की पढ़ाई पर फोकस हाेगा। फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के तहत प्री स्कूलिंग को बेहतर बनाया जाएगा। मतलब आंगनबाड़ी में ही बच्चों को अक्षर ज्ञान मिल जाएगा। वहीं तीसरी कक्षा तक बच्चों को उस स्तर तक पहुंचा दिया जाएगा कि वह वाक्य बनाना सीख जाए और 1 हजार तक की गिनती कर ले। इस तरह तीन से 9 साल की उम्र तक के बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा।  


"जमुआ में एफएलएन की बैठक संपन्न" 

सोमवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी के कक्ष में एफएलएन समिति की बैठक संपन्न हुई जिसमें मुख्यरूप से जमुआ प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार, जमुआ बीईईओ विद्यासागर मेहता, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार दुबे, लक्ष्य संस्था के सचिव बि.के. चौरसिया इत्यादि की उपस्थिति रही। प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जमुआ में इस महति मिशन को अक्षरशः उतारा जायेगा। इसके लिए जो भी आवश्यक होंगे बुनियादी यतन किये जायेंगे। जमुआ बीडीओ अशोक कुमार ने कहा की यह शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति के समान है। जमुआ में इसे धरातल पर उतारा जायेगा। बताया तीसरी कक्षा तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने व बुनियादी संख्या ज्ञान के स्तर को प्राप्त कर ले। बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहे और वे प्रभावी संवाद में निपुण बने, यही काेशिश हाेगी। लक्ष्य के बिजय कुमार चौरसिया ने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तत्वाधान में इस मुद्दे का विशेष संज्ञान लेते हुए निपुण भारत मिशनन के अंतर्गत मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLNFLN) कार्यक्रम वर्ष 2021 में शुरू किया गया है। इसमें 3 से 9 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान दक्षता को बेहतर करने की बात कही गयी है। इसका अर्थ है कि इसमें पूर्व प्राथमिक कक्षा से कक्षा 3 तक के बच्चे को फोकस करना। यह कोई योजना नहीं बल्कि एक मिशन है। जमुआ बीईईओ विद्यासागर मेहता ने कहा कि इसकाे लेकर बच्चों को जाेड़े बना कर कार्य कराना, प्रोजेक्ट कार्य, प्रश्नाेत्तरी, राेल प्ले, खेल, माैखिक-लिखत प्रस्तुतिकरण जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। जमुआ चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश दुबे ने कहा शारीरिक विकास, अभिव्यक्ति, क्रिएटीविटी, अपनी भावनाओं को समझना, अभिव्यक्त करना और एक-दूसरे के साथ मिल कर काम करने जैसी भावना बच्चों में पैदा की जाएगी।

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