हिंदी विद्यापीठ में मनाई गई 'हिंदी दिवस' हिंदी भारत की है पहचान: कुलसचिव



देवघर 14 सितंबर: हिंदी की सेवा में निरंतर प्रयासरत संस्था हिंदी विद्यापीठ में ' हिंदी दिवस' पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बीच संस्थान के कुलसचिव श्री के.के.ठाकुर ने हिंदी को भारत की पहचान बताते हुए कहा कि हिंदी को सर्वमान्य बनाने के लिए 14 सितंबर 1953 को प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा ये सच है कि राष्ट्रभाषा के विकास से देश का भी विकास होता है। हमें अपनी सोच बदलते हुए हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक प्रयास करना चाहिए। इससे पूर्व गोवर्धन साहित्य महाविद्यालय के शिक्षकों में से डा. संजय खवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि निःसंदेह हिंदी अपने आप मे एक समृद्ध भाषा है,इसे स्वीकारने की आवश्यकता है। राघवेंद्र सुमन ने लोगों से अपनी भाषा के प्रति समर्पण की भावना जगाने का अनुरोध किया। वहीं नीतीश द्वारी ने कहा कि हिंदी सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। अंजनी झा ने अपने सारगर्भित संबोधन में सरकार से सचिवालय में हिंदी को प्राथमिकता देने की मांग की। इसी क्रम में हिमांशु झा ने हिंदी दिवस को गर्व का विषय बताते हुए हिंदी को उत्कृष्ट भाषा बताया। साथ ही हिंदी को भारत के मस्तक की बिंदी की संज्ञा दी। इसके सम्मान के लिए कार्य करने की बात उन्होंने कही। इस अवसर पर कार्यालय अधीक्षक संजय कुमार व मीडिया प्रभारी शम्भू सहाय, हरि परिहस्त,संजीव चौधरी,शंकर झा,दीपक पत्रलेख,ज्योति जेजवाड़े,गंगा द्वारी समेत अमरनाथ मुखर्जी,राजेश सरेवार,महेंद्र झा,संतोष भारती, उदयनाथ ठाकुर,अविनाश परिहस्त,विशाल पंडित, सुदीप्त सरकार,संजय प्रसाद झा,सुरेश खोवाला,किशोर झा,संतोष दास आदि मौजूद थे।

कोई टिप्पणी नहीं