विकास के नाम पर आदिम जनजातियों के साथ हो रहा खिलवाड़, प्रखंड के पदाधिकारी गहरी निंद्रा में



दुमका   शिकारीपाड़ा प्रखंड के सिमानीजोर पंचायत अंतर्गत आदिम जनजाति बहुल आबादी ग्राम बाबूपाड़ा के ग्रामीणों के मांग पर आज समाज सेवी सह पूर्व जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष हाबिल मुर्मू  के नेतृत्व में "हमारी सरकार हमारी हालत " कार्यक्रम आयोजन किया गया।

          जिसमें बाबूपाड़ा ग्राम के ग्राम प्रधान भीमेश्वर गृही एवं वार्ड सदस्य कालीचरण गृही सहित भारी संख्या में आदिम जनजाति महिला-पुरूष एवं युवाओं ने  भाग लिया। इस अवसर पर  सरकार के नजर में विलुप्तप्राय इन आदिम जनजातियों ने  अपने निज ग्राम के समस्त जनसमस्याओं  को साझा करते हुए कहा कि हमारे ग्राम में तकरीबन साढ़े तीन सौ की आदिम जनजाति की आबादी है जिनमें वर्ष 2019 में मात्र सात परिवार को ही बिरसा आवास मिला, बाद बाकी सभी जरूरतमंद परिवारों को पीएम आवास तक नहीं मिला।   हम विगत चार पाँच माह से विद्युत ट्रास्फार्मर   की खराबी के कारण  लाॅ वोल्टेज की समस्या और पेयजल आपुर्ति टंकी की खराबी  के कारण  पेयजल की समस्या से जूझने के लिए   मजबूर हैं।  वे कहते हैं कि ग्राम बाबूपाड़ा के प्रधान टोला में कुल  छः चपाकल में से चार खराब हैं।  बाबूपाड़ा के अन्य संताल टोला उर्फ गाडा टोला में  निवास कर रहे सात  संताल परिवार के   लोग चपाकल की खराबी के  कारण   नाला का पानी  पीने के लिए विवश हैं।  वहीं मुख्य आवागमन सड़क अत्यधिक पुराने होने से बड़े- बड़े गड्ढे होने  और जर्जर हो जाने के कारण सामान्य आना जाना अत्यंत तकलीफदेह  तथा अंबुलेंस सेवा मिलना भी मुश्किल हो गया है।  दूसरी तरफ आंगनबाड़ी भवन  बहुत पुराने, जर्जर व खंडहर होने के कारण पोषक क्षेत्र  ग्राम बाबूपाड़ा और जगतपुर के लाभुक बच्चे   और  माताओं  को आंगनबाड़ी भवन के अभाव में  उचित व्यवस्था  व वातावरण उपलब्ध कराने में    काफी  समस्या  हो रही है।  ग्राम बाबूपाड़ा होकर रेलवे लाईन निर्माण के दरम्यान ग्राम में  जेसीबी से खोदे गये दो  बड़े गहरे गड्ढे तालाब के रूप में मौजूद है जहाँ    उचित तौर पर  तालाब घाट का निर्माण नहीं किए जाने के कारण जान जोखिम में डालकर  महिला-पुरूष एवं  छोटे बच्चे  स्नान करने के  लिए मजबूर हैं जिसमें दुर्घटना का डर सदा बना रहता है। इस संदर्भ में स्थानीय पंचायत सेवक को अवगत कराने के बावजूद भी कोई पहल नहीं हुआ। 



    वे आगे बताते हैं कि वे सरकार के जनहित योजना से  भी वंचित हैं। उन्हें स्थानीय प्रशासन  से  लगातार नजरअंदाज का शिकार होना पड़ रहा है।  वे सरकार के ओर से बेसुध जीवन जीने के लिए विवश हैं ।  उपस्थित आदिम जनजाति महिला-पुरूष कहते हैं कि  आदिम जनजाति  महिला पेंशन योजना से कुल  दस महिला पेंशन से वंचित हैं। जिसमें  अमिता रानी, बसंती रानी, करमी रानी, पिंकी रानी, फूलमुनी रानी, पानसुरी रानी, सावित्री रानी, दुर्गी रानी, पुतुल रानी, चांदमुनी रानी का नाम प्रमुख है।   

    वे आगे कहते हैं कि वे जनवितरण प्रणाली के डोर स्टेप डिलीवरी के तहत मिलने वाला राशन  पैकेज संबंधी आदिम जनजाति डाक योजना  व अंत्योदय कार्ड से  कुल ग्यारह परिवार वंचित हैं ।  उन्हें अंत्योदय कार्ड के जगह  पीएचएच कार्ड उपलब्ध कराए जाने के कारण आदिम जनजाति डाक योजना से वंचित होना पड़ता है।   जिसमें कालीचरण गृही, किशोर गृही, भीमेश्वर गृही,  विष्णु गृही, ईश्वर गृही, लखन गृही, धानेश्वर गृही, सूरजवती रानी, जगु देहरी, रविन्द्र देहरी, प्रेमलाल देहरी का नाम प्रमुख है।

         वे बताते हैं कि  अभी ग्राम में कुल नौ गरीब परिवार राशन कार्ड से वंचित हैं  जिसके कारण उन्हें हर माह राशन से वंचित होना पड़ रहा है जिसमें स्टेफन हांसदा,अमिता रानी, विष्णु गृही, राजदूत गृही, अमीता रानी, विपुती रानी, सावित्री रानी, बुधना देहरी,फूलो रानी का नाम प्रमुख है।

      आगे हरेन्द्र गृही नामक युवक बताते हैं कि गांव के कुल छः आदिम जनजाति किसान पीएम किसान सम्मान निधि से वंचित हैं।  वे बताते हैं कि उनके बैंक खाता में विगत 2019 से अब तक कुल सात किस्त का खाता में प्रेषण दिखता है मगर खाता में राशि नहीं भेजा गया है। पीएम किसान सम्मान निधि से वंचितों का नाम हरेन्द्र गृही, कालीचरण गृही, दिनेश्वर गृही, बासुदेव गृही, विष्णु गृही व राजेन्द्र गृही प्रमुख है। 

       इस विषय पर ग्रामीणों ने    समाज सेवी हाबिल मुर्मू के समक्ष मांग रखा कि हमारे विभिन्न जनसमस्याओं को स्थानीय प्रशासन व सरकार तक पहुँचाने में हमें सहयोग  प्रदान करें। 


    इस संदर्भ में हाबिल मुर्मू ने चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन से मांग किया कि  विलुप्तप्राय आदिम जनजाति को बचाने के  लिए विशेष अभियान चलाकर उनकी आवश्यक सेवाएँ और व्यवस्था उपलब्ध कराया जाय। 

       इस अवसर पर प्रखंड कांग्रेस प्रभारी गौरव कुमार सिंह,  गोपीजीवन पाल, भीमेश्वर गृही, कालीचरण गृही,सुकलाल देहरी, हरेन्द्र गृही, फागू गृही,विष्णु गृही,परमेश्वर गृही, प्रेमलाल देहरी, राजेन्द्र गृही, अमिता रानी, रूबी रानी, फूलो रानी, निशा रानी, बसंती रानी, लुखीराम देहरी सहित भारी संख्या में आदिम जनजाति महिला-पुरूष उपस्थित थे। 

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