उत्तम कुमार व कमलापति त्रिपाठी की जीवनी आज भी प्रेरणास्रोत है : डॉ. सिंह देव



देवघर: स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले भारतीय अभिनेता, निदेशक, निर्माता उत्तम कुमार एवं हिन्दी और संस्कृत के विद्वान व ग्रंथकार कमलापति त्रिपाठी की जयंती मनाई गई। मौके पर विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने दोनों भारतीय सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा- उत्तम कुमार बांग्ला और हिन्दी फ़िल्मों का एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनका जन्म हुआ था 3 सितंबर 1926 को भवानीपुर कोलकाता के गिरीश मुखर्जी रोड स्थित अपने पुश्तैनी मकान में। अभिनेता, निर्माता, निर्देशक उनकी बतौर नायक पहली फ़िल्म थी नितिन बोस निर्देशित दृष्टिदान। सुचित्रा सेन के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई। सुचित्रा के साथ उनकी सप्तपदी, पौथे होलो देरी, हारानो सुर, चावा पावा, बिपाशा, जीवन तृष्णा और सागरिका जैसी फ़िल्में बेहद लोकप्रिय रहीं। बांग्ला के साथ-साथ उन्होंने पांच हिन्दी फ़िल्मों में भी अभिनय किया। 1967 में छोटी सी मुलाक़ात, 1975 में अमानुष, 1 977 में आनंद आश्रम 1979 में क़िताब और दूरियाँ। उनकी ख्वाहिश थी कि अभिनय करते हुए उनका दम निकले और हुआ भी ऐसा ही। 1980 में "ओ गो बोधु शुंदरी" की शूटिंग के दौरान हृदयाघात से उनका निधन हो गया। कमलापति के सन्दर्भ में डॉ. देव ने कहा- कमलापति त्रिपाठी एक भारतीय राजनेता थे और  इसके साथ ही वे एक वरिष्ट कांगेसी नेता भी थे। कमलापति त्रिपाठी संविधान सभा के सदस्य रहे, 1971 से 1973तक वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और इसके बाद भारत के रेल मंत्री रहे। उन्होने 1921 के असहयोग आंदोलन में भाग लिया। वे त्रिपाठी हिन्दी और संस्कृत के विद्वान व ग्रंथकार थे। उन्होने ‘आज’ तथा ‘संसार’ नामक समाचार पत्रों का सम्पादन किया। उनका जन्म 3 सितंबर, 1905 को हुआ था। उन्होंने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि और डी. लिट. की उपाधि प्राप्त की थी। वे स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने 1921 के दौरान असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया। वे सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी सक्रिय भागीदार थे, जिसके लिए उन्हे जेल की सजा भी काटनी पड़ी। 1942 में वे आंदोलन में भाग लेने के लिए मुंबई चले गए थे तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और तीन साल तक के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने 4 अप्रैल, 1971 से 12 जून, 1973 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया। 1973 से 1978, 1978 से 1980 और 1985 से 1986 में वे राज्य सभा के सदस्य भी रहे थे। 1980 से 1984 तक वे लोक सभा के सदस्य थे। वेे हिन्दी और संस्कृत के विद्वान् व ग्रंथकार थे। उन्होंने ‘आज’ तथा ‘संसार’ नामक समाचार पत्रों का सम्पादन किया। उन्हे गांधी दर्शन से संबंधित पुस्तक पर मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया। वो संसदीय विषयों के अच्छे वक्ता होने के साथ ही एक प्रभावशाली वक्ता भी थे। उनकी 8 अक्टूबर, 1990 को वाराणसी में मृत्यु हो गई।

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