टिनी टॉट्स डे नृत्य प्रतियोगिता के ग्रुप ए एवं बी का परिणाम घोषित



देवघर: केरला एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी तथा ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के युग्म बैनर तले टिनी टॉट्स डे ऑनलाइन नृत्य प्रतियोगिता के ग्रुप ए एवं बी के विजयी प्रतिभागियों की सूची की घोषणा की गई। निर्णायक मंडली द्वारा कई बिंदुओं पर बारीकी से निर्णय लिया गया जिसमें, भाव-भंगिमा, परिधान, पीछे का बैकग्राउंड, ताल के साथ नृत्य की प्रस्तुति एवं हाल में इसकी रेकॉर्डिंग हुआ कि नहीं पर विशेष ध्यान दिया गया। कुछ बच्चों ने पूर्व में किये गए नृत्य का रेकॉर्डिंग भेजा है। सूची के संदर्भ में केरला सोसाइटी के सचिव डॉ. जय चन्द्र राज ने जानकारी दी कि ग्रुप ए में छपरा की पंखुड़ी कुमारी को प्रथम, बाँकुड़ा की मिताली चक्रबर्ती को द्वितीय जबकि बिहार के ऋद्धिमान कुमार को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इस ग्रुप में रश्मि को चतुर्थ, पिंकी को पंचम, महुआ, आलोक, सुरभि, रंजन,प्रेरणा एवं शिल्पी को सांत्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। ग्रुप बी में देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की सृष्टि केजरीवाल व संत जेवियर्स हाई स्कूल की सृष्टि सिन्हा को युग्म रूप से प्रथम, वाशिंगटन डीसी स्थित टैलबोट हिल एलिमेंट्री स्कूल की आकर्षा शर्मा को द्वितीय, पश्चिम बंगाल के हुगली जिला में स्थित झरना नृत्तयन के आदित्य लाहिड़ी को तृतीय, ब्राइट कैरियर स्कूल की पूजा कुमारी को चतुर्थ, इसी विद्यालय की प्रीति कुमारी तथा विवेकानंद मध्यविद्यालय की माही कुमारी को पंचम जबकि इसी विद्यालय के सूलुक कुमार, अमित कुमार, रिया कुमारी, खुशी कुमारी, ब्राइट की अन्वी कुमारी, बिहार की राधिका, सरगम, पूजा, पश्चिम बंगाल की प्रेयसी मुखर्जी, रीना दत्ता, सुप्रीति बनर्जी, मौसूमी कर्मकार, अमृता सरकार, महिमा चटर्जी व अनंदिता प्रामाणिक को सांत्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। सभी विजेताओं को 26 सितम्बर ऑफिसर कॉलोनी स्थित संत माइकल एंग्लो विद्यालय में पुरस्कृत किया जाएगा। डॉ. जे.सी. राज ने कहा- नृत्य भी मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रसमय प्रदर्शन है। यह एक सार्वभौम कला है, जिसका जन्म मानव जीवन के साथ हुआ है। बालक जन्म लेते ही रोकर अपने हाथ पैर मार कर अपनी भावाभिव्यक्ति करता है कि वह भूखा है- इन्हीं आंगिक -क्रियाओं से नृत्य की उत्पत्ति हुई है। यह कला देवी-देवताओं- दैत्य दानवों- मनुष्यों एवं पशु-पक्षियों को अति प्रिय है। भारतीय पुराणों में यह दुष्ट नाशक एवं ईश्वर प्राप्ति का साधन मानी गई है। अमृत मंथन के पश्चात जब दुष्ट राक्षसों को अमरत्व प्राप्त होने का संकट उत्पन्न हुआ तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर अपने लास्य नृत्य के द्वारा ही तीनों लोकों को राक्षसों से मुक्ति दिलाई थी। इसी प्रकार भगवान शंकर ने जब कुटिल बुद्धि दैत्य भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि वह जिसके ऊपर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाए- तब उस दुष्ट राक्षस ने स्वयं भगवान को ही भस्म करने के लिये कटिबद्ध हो उनका पीछा किया- एक बार फिर तीनों लोक संकट में पड़ गये थे तब फिर भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर अपने मोहक सौंदर्यपूर्ण नृत्य से उसे अपनी ओर आकृष्ट कर उसका वध किया।

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