राधाकृष्णन एवं मदर टेरेसा आज भी अमर हैं हर भारतीय के दिलों में : डॉ. प्रदीप



देवघर  : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले अपने वतन के दो विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वेक्सो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- कहते हैं एक शिक्षक समाज को दिशा देने का काम करता है और अच्‍छा इंसान बनाता है। देश में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। हमारे जीवन में शिक्षक की अहमियत को जानने और उनके सम्मान में यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं एक शिक्षक समाज को दिशा देने का काम करता है और अच्‍छा इंसान बनाता है। भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पूरा जीवन प्रेरणा

 देने वाला है। जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस समय जवाहरलाल नेहरू ने राधाकृष्णन से आग्रह किया कि वह विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें। नेहरूजी की बात को स्वीकारते हुए उन्होंने 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप मे कार्य किया। 13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक वे देश के उपराष्ट्रपति रहे। 13 मई 1962 को ही वे भारत के राष्ट्रपति चुने गए। राजेंद्र प्रसाद की तुलना में इनका कार्यकाल काफी चुनौतियों भरा था क्योंकि जहां एक ओर भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध हुए जिसमें चीन के साथ भारत को हार का सामना करना पड़ा था वहीं दूसरी ओर दो प्रधानमंत्रियों का देहांत भी इन्हीं के कार्यकाल के दौरान ही हुआ था। मदर टेरेसा के सम्बंध में डॉ. देव ने कहा- उनकी मृत्यु आज ही के दिन 5 सितम्बर, 1997 को हुई थी। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में लगभग सारे लोग सिर्फ अपने लिए जीते हैं पर मानव इतिहास में ऐसे कई मनुष्यों के उदहारण हैं जिन्होंने अपना तमाम जीवन परोपकार और दूसरों की सेवा में अर्पित कर दिया। मदर टेरेसा भी ऐसे ही महान लोगों में एक हैं जो सिर्फ दूसरों के लिए जीते हैं। मदर टेरेसा ऐसा नाम है जिसका स्मरण होते ही हमारा ह्रदय श्रध्धा से भर उठता है और चेहरे पर एक ख़ास आभा उमड़ जाती है। मदर टेरेसा एक ऐसी महान आत्मा थीं जिनका ह्रदय संसार के तमाम दीन-दरिद्र, बीमार, असहाय और गरीबों के लिए धड़कता था और इसी कारण उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन उनके सेवा और भलाई में लगा दिया। उनका असली नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू था। अलबेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल की कली होता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मदर टेरेसा एक ऐसी कली थीं जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही गरीबों, दरिद्रों और असहायों की जिन्दगी में प्यार की खुशबू भर दी थी।

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