जैन मंदिर में संवत्सरी पर्व मनाया गया।



नाला (जामताड़ा)--- सालकुंडा जैन मंदिर में जैन धर्मावलंबियों के द्वारा संवस्तसरी पर्व बड़े धूमधाम एवं श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर जैन धर्म के अनुयाई राजेंद्र माजी तथा सुप्रिया माजी ने जानकारी देते हुए बताया कि संवत्सर ही पर्व हमारे जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। आज हम सब एक दूसरे से क्षमा मांगते है और पिछले पापो की आलोचना करते है तथा यह प्रण लेते है कि हम किसी जीव का दिल नहीं दुखाएँगे ओर सभी जीवों को क्षमा दान देंगे। इसलिये यह क्षमा दिवस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिवस अहिंसा परमो धर्म के सिंद्धात पर चलता है। इस दिन सभी लोग उपवास, एकासना या कुछ न कुछ तप करते ही है, वैसे तो पर्युषण के आठो दिन सभी तप और साधना में लीन रहते है पर संवस्तसरी के दिन सभी अपनी अनुकूलता के अनुसार उपवास करते ही है। उन्होंने बताया कि सालकुंडा के 4 लड़कियो ने 3 उपावस ( अट्ठम तप ) किया जिसमें वह 3 दिन तथा रात सिर्फ उबाला हुआ पानी पीकर ही रहे और वो भी सूर्यास्त के बाद बिना पानी पिये। इन चारों लड़कियो की खूब खूब अनुमोदना । मालूम हो कि इस धार्मिक अनुष्ठान में प०बंगाल के वर्द्वमान जिले का चंदन माजी ने मंदिर में पूजा किया तथा यह नियम पालन करने का संकल्प लिया कि आजीवन  गुरुवार ओर शुक्रवार को शुध्द शाखाहारी रहेंगे। वहीं बालिका मंडल की सुप्रिया माजि ने कहा कि जीवों से क्षमा मांगना हमारा कर्तव्य है। आज के इस धार्मिक अनुष्ठान में राजेन्द्र माजि, मुम्बई निवासी चंद्रेश भाई, जिगनेश भाई के अलावे समस्त ग्रामीण भक्तजन मौजूद थे।

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