बिहार के लोगों की खुशहाली और समृद्धि हेतु जनोन्मुखी बनें बैंक : तारकिशोर

 


पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें वार्षिक साख योजना, साख-जमा अनुपात सहित कृषि, उद्योग तथा पशुपालन आदि क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ वित्तीय साक्षरता एवं वित्तीय समावेशन को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।


उपमुख्यमंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि 2005 से लगातार राज्य सरकार ने बिहार में आधारभूत संरचनाओं का विकास किया है। बिहार में सडक़ संपर्कता, बिजली की व्यवस्था, विधि-व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय समावेशन के लिए काम करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य के छोटे व्यवसायियों, लघु उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं आदि को यदि सहज ऋण के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, तो राज्य के विकास में काफी योगदान हो सकता है।


उन्होंने कहा कि कोरोना की वैश्विक चुनौती से जूझते हुए देश की आर्थिक परिस्थितियां धीरे-धीरे बदल रही हैं। बिहार में हमने 20 लाख से अधिक रोजगार सृजन का वायदा किया है और इस सपने को साकार करने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आज डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि बैंक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी कार्यप्रणाली को जनोन्मुखी बनाते हुए बेहतर रूप से परफॉर्म करें।


उन्होंने कहा कि यदि राज्य में एक उद्योग लगता है, तो उससे 100 से लेकर 1000 लोगों को रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में खासतौर पर पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरीपालन इत्यादि क्षेत्रों में बेहतर काम करने की संभावनाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समृद्धि में इन आजीविकाओं की बड़ी भूमिका है। बैंक इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लोगों को लाभान्वित करें।


उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने के लिए नीतियां बनायी हैं। निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। ऐसी स्थिति में बैंकों का सकारात्मक प्रयास काफी महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जा रहा है कि छोटे-छोटे व्यवसायियों को बैंक खाता खोलने में बैंकों द्वारा जीएसटीएन नंबर की मांग की जाती है, जो खेदजनक है। उन्होंने कहा कि 40 लाख से नीचे के कारोबार पर जीएसटीएन की कोई जरूरत नहीं है। इस संबंध में जीएसटी काउंसिल द्वारा भी स्पष्ट मार्गनिर्देश जारी किए गए हैं।


बैठक को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री मोहम्मद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बैंक योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखकर अपना निगाह बदलें। बिहार में इथेनॉल प्रोजेक्ट के तहत कई बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू हो रहे हैं। राज्य सरकार ने इन बड़ी परियोजनाओं को रिकॉर्ड टाइम में स्वीकृति प्रदान की है। कई परियोजनाओं को 24 घंटे के अंदर आवश्यक जांच को पूरा करते हुए स्वीकृति प्रदान की गई है। अब जरूरत इस बात की है कि बैंक भी अपने शाखाओं के अंतर्गत निवेशकों को ऋण प्रदान करने हेतु टाइम बाउंडेड व्यवस्था को लागू करें, ताकि सरकार के प्रयास को सार्थक गति मिल सके। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बैंकों को खाताधारियों के बैंक खाते को आधार से जोडऩे के काम में तेजी लाने की जरूरत है।


बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के घर बेहतर तरीके से बन सकें, इसके लिए बैंकों को आवश्यकता आधारित ऋण भी मुहैया कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि  बिहार में स्वयं सहायता समूहों के अंतर्गत ऋण अदायगी के अच्छे परफॉर्मेंस देखे गये हैं। इन स्वयं सहायता समूहों को संवर्दि्धत करने हेतु बैंक ऋण मुहैया कराएं।


बैठक के दौरान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद यूनुस हुसैन हाकिम, विकास आयुक्त मोहम्मद आमिर सुबहानी, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री ब्रजेश मेहरोत्रा, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ, वित्त विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, कृषि विभाग के सचिव एन. श्रवण, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी. निबंधन महानिरीक्षक बी. कार्तिकेय, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक सुरेंद्र राणा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अपर निदेशक संजीव दयाल, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डा सुनील कुमार सहित वित्त विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारीगण, सभी बैंकों के वरीय पदाधिकारीगण एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।


इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान सभी जिलों के जिला पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता बैंकिंग, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

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