नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं विजयलक्ष्मी पण्डित आज भी हमारे आदर्श हैं : डॉ. प्रदीप



देवघर : विद्वानों की राय की सर्वसम्मति में, सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को जापानी शासित फॉर्मोसा में उनके अतिभारित जापानी विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद थर्ड-डिग्री बर्न से हुई थी। विजयलक्ष्मी पण्डित का जन्म 18 अगस्त 1900 को गांधी-नेहरू परिवार में हुआ था। नेताजी की पुण्यतिथि एवं विजयलक्ष्मी पण्डित की जयंती के अवसर पर स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा- सुभाषचंद्र बोस के अलावा भारत के इतिहास में ऐसा कोई व्यक्ति ने जन्म नही लिया, जो एक साथ महान् सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति का अद्भुत खिलाड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरुषों, नेताओं के समकक्ष साधिकार बैठकर कूटनीति तथा चर्चा करने वाला हो। नेताजी में सच्चाई के सामने खड़े होने की अद्भुत क्षमता थी। उनका सबसे प्रसिद्ध उद्धरण था "मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा"। एक अन्य प्रसिद्ध उद्धरण दिल्ली चलो, यह वह फोन था जो उन्हें प्रेरित करने के लिए आईएनए सेनाओं को देता था। जय हिंद, या, "भारत की जय!" उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया एक और नारा था और बाद में भारत सरकार और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा अपनाया गया था। उनके द्वारा गढ़ा गया एक और नारा था "इत्तेहाद, एत्माद, क़ुर्बानी"। आईएनए ने नारा इंकलाब जिंदाबाद का भी इस्तेमाल किया, जिसे मौलाना हसरत मोहानी ने बनाया था। विजय लक्ष्मी पंडित भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की बहन थीं। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में विजय लक्ष्मी पंडित ने अपना अमूल्य योगदान दिया। इनका जन्म 18 अगस्त 1900 को गांधी-नेहरू परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा मुख्य रूप से घर में ही हुई। 1921 में उन्होंने काठियावाड़ के सुप्रसिद्ध वकील रणजीत सीताराम पण्डित से विवाह कर लिया। गांधीजी से प्रभावित होकर उन्होंने भी आज़ादी के लिए आंदोलनों में भाग लेना आरम्भ कर दिया। वह हर आन्दोलन में आगे रहतीं, जेल जातीं, रिहा होतीं और फिर आन्दोलन में जुट जातीं। उनके पति को भारत की स्वतंत्रता के लिए किये जा रहे आन्दोलनों का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार करके लखनऊ की जेल में डाला गया जहाँ उनका निधन हो गया।

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