सारठ : पेंशन से वंचित हैं आदिम जनजाति के बुजुर्ग दंपति



सारठ : एक तरफ जहां आदिम जनजाति (पहाड़िया समुदाय) के विकास व संरक्षण के लिए सरकार द्वारा कई योजनायें चलाई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की उदासीनता की वजह से पहाड़िया परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है और जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। जमुवासोल पंचायत के जमुनियाटांड़ गांव में महज एक घर पहाड़िया समुदाय का रहते है और घर के बुजुर्ग मालती पुजहर व उनके पति दिनु पुजहर को वृद्ध पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलता हैं। महिला मालती पुजहर ने बताया कि पांच वर्ष पहले पेंशन योजना से उनको जोड़ा गया था और पहली बार 03 सितम्बर 2016 को उनके ग्रामीण बैंक गोपीबांध शाखा के बचत खाते में तीन माह की पेंशन की राशि 1800 रुपये आया था। लेकिन एक वर्ष के बाद खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई। बताया कि अंतिम बार 10 अगस्त 2017 को दो माह की पेंशन की राशि 1200 रुपये मिला। उसके बाद से आज तक उनका पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। बताया कि पेंशन राशि भुगतान को लेकर कई बार दोनों बुजुर्ग  दंपति ग्रामीण बैंक के चक्कर भी लगाये। जहां बैंक कर्मी द्वारा उन्हें बताया गया कि दस्तावेज के अनुसार मालती पुजहर की मौत हो गई है। इसको लेकर पीड़िता ने बीडीओ व मुखिया को लिखित आवेदन भी दिया। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। मालती पुजहर सरकारी मुलाजिम के पास फरियाद करके ये कहकर थक चुकी है कि वो मरी नहीं है बल्कि जिंदा है और स्वस्थ भी हैं। लेकिन फिर भी उनके फरियाद को अनसुना किया जा रहा है। मालती के पति दिनु पुजहर कहते है कि उनका भी उम्र 65 साल से अधिक हो गया। लेकिन उन्हें भी आज तक पेंशन योजना का लाभ नहीं मिला है। बताया कि पत्नी की पेंशन से किसी तरह घर का नमक, तेल व दवा चलता था। लेकिन पिछले चार साल से राशि नहीं मिली है। अंत्योदय योजना से राशन मिलता है। उसी से किसी तरह गुजर बसर करते है। शरीर भी काफी कमजोर है और अक्सर बीमार रहते है। कहीं काम भी नहीं कर पाते और भूमिहीन भी हैं। आभाव में जीना भी मुश्किल हो गया है।

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