संस्कृत गीत प्रतियोगिता के बी ग्रुप में दिल्ली की शुभांगी एवं नोएडा की माधवी अव्वल



देवघर : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म तले संस्कृत दिवस सप्ताह के अंतर्गत आयोजित गीत व कविता प्रतियोगिता के ग्रुप बी का परिणामस्वरूप की घोषणा हुई। प्राप्तांक के अनुसार फ्रीलांसर, नई दिल्ली की शिक्षिका शुभांगी तिवारी एवं मानव संसाधन, इनिशियाट्रिक्स टेक्नोलॉजीज, नोएडा की माधवी मधुकर को युग्म रूप से प्रथम, मध्यप्रदेश स्थित अरी, सिवनी, मध्यप्रदेश स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक लालबहादुर राहंगडाले एवं रमा देवी बाजला महिला महाविद्यालय की वितस्था केशरी को युगमरूप से द्वितीय जबकि श्रीमती नेहा जग्गी एस.एल.एस.डी ए वी पब्लिक स्कूल, मौसम विहार, नई दिल्ली की शिक्षिका नेहा जग्गी तथा झारखंड राज्य के देवघर जिले के कुशमाहा, मधुपुर निवासी अदिति कुमारी को युग्म रूप से तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इस ग्रुप में 18 वर्ष के ऊपर प्रतिभागियों को रखी गई थी।  प्रतियोगिता ऑनलाइन रखी गई थी। सभी विजयी प्रतिभागियों को 29 अगस्त को झारखंड राज्य की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में पुरस्कृत किया जाएगा। इसकी जानकारी विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव एवं कोषाध्यक्ष प्रभाकर ने दी। संस्कृत के महत्व के संदर्भ में शुभांगी तिवारी ने कहा- संस्कृत भाषा देववाणी कहलाती है। यह न केवल भारत की ही। महत्त्व पूर्ण भाषा है। अपितु विचारक उसे विश्व की प्राचीनतम व श्रेष्ठतम भाषा मानते हैं। कुछ  समय  पहले कुछ पाश्चात्य विद्वानों द्वारा देश के  साहित्य को प्राचीनतम माना जाता था परन्तु अब सभी विद्वान् एक मत से संस्कृत के प्रथम ग्रंथ ऋग्वेद को सबसे  प्राचीन मानते है। माधवी मधुकर नेे - संस्कृत में मानव जीवन के लिए उपयोगी चारों पुरुषार्थों का विवेचन बड़े ही विस्तार से किया गया है। अत : संस्कृत  केवल धर्म प्रधान ही है ऐसा नहीं है। भौतिकवाद दर्शन से सम्बंधित विषयों पर भी प्राचीन ग्रंथकारों का ध्यान गया था। कौटिल्य का अर्थशास्त्र एक विख्यात ग्रंथ है जिसनमें राजनीतिशास्त्र विषयक सारी  जानकारी मिलती है। वात्स्यायन द्वारा रचित काम - शास्त्र में गृहस्थ जीवन के लिए क्या करना चाहिए अच्छे ढंग से बताया  गया है। लालबहादुर ने कहा- प्राचीन भारतीय जीवन में धर्म को ही अधिक महत्व देने के कारण संस्कृत  धार्मिक दृष्टि से भी विशेष गौरव रखता है। साथ ही भारतीय धर्म और दर्शन का सम्यक् ज्ञान प्राप्त करने के लिए वेद का अध्ययन तथा ज्ञान बहुत ज़रूरी है। वेद वह मूल स्रोत्र है जहां से विभिन प्रकार की धार्मिक धाराएँ निकल कर मानव हदय को सदा संतुष्ट करती आई हैं , केवल भारतवासियों के लिए ही नहीं बल्कि अन्य देशों तथा पुरे विश्व के लिए भी मार्गदर्शक के रूप में है। वेदों के प्रभाव  का ही फल है कि पश्चिमी विद्वानों ने तुलनात्मक पुराणशास्त्र जैसे नवीन शास्त्र को ढंढ़ निकाला। इस शास्त्र से पता चलता है कि प्राचीन काल में देवताओं के संबंध में लोगों के क्या - क्या विचार थे और किन - किन उपासनाओं के प्रकारों से वे उनकी कृपा प्राप्त करने में सफल होते थे। नेहा जग्गी ने कहा- सांस्कृतिक दृष्टि से भी संस्कृत साहित्य विश्व में गौरवपूर्ण स्थान रखता है। विद्वानों का कहना है कि मध्य एशिया के चीन आदि देशों पर भारतीय संस्कृति और बुद्ध धर्म की जो छाप है वह सर्वविदित है। कोरिया की लिपि भी भारतीय लिपि पर आश्रित है। तिब्बत भारतीय धर्म और साधना का चिरकाल से क्षेत्र रहा है।

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