राष्ट्रीय स्तर निबंध प्रतियोगिता के स्थानीय विजेता हुए पुरस्कृत



देवघर : पिछले दिन स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था जिसमें हजारों विद्यार्थियों ने अपनी भागीदारी निभाई थी। आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय विजेताओं को विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, गीता देवी डी ए वी पब्लिक स्कूल की शिक्षिका पूजा झा, ब्राइट कैरियर स्कूल की प्राचार्या पुष्पा सिंह, सतसंग निवासी जाने माने चित्रकार रणजीत जाना, समाजसेवी प्रियांशु प्रिया, बबलू सिंह व सरोज देवी के करकमलों से पुरस्कृत किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार देवघर निवासी राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति में पाठ्यरता आयुषी अन्या, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल की छात्रा आराध्या प्रिया, दीनबंधु उच्च विद्यालय की छात्रा शिल्पा कुमारी, देवघर महाविद्यालय की छात्रा निकिता सिंह, इंडियन पब्लिक स्कूल के छात्र निशांत कुमार, संत माइकल एंग्लो विद्यालय की छात्रा आर्या सिंह, कृष्णानंद मेमोरियल एकेडेमी, असरगंज, मुंगेर, बिहार की छात्रा रचना प्रिया, मिश्रा रेसिडेंशियल पब्लिक स्कूल की छात्रा नेहा सूर्या, ब्राइट कैरियर स्कूल के छात्र निशांत कुमार, संत कोलंबस स्कूल की छात्रा पलक झा एवं अन्य उपस्थित थे। मौके पर डॉ. देव ने विद्यार्थियों को कहा- जिनको सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिनको सपने पूरा करना अच्छा लगता है उनको दिन छोटा लगता है। हम अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर हम अपनी आदतें बदल सकते है और निश्चित रूप से हमारी आदतें हमारा भविष्य बदल देगी। रवि केशरी ने कहा- एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जानें के बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को ज़िंदगी कहते है। वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक्त देखें जाते है, सपने वो सच होते है जिनके लिए आप सोना छोड़ देते है। पुष्पा सिंह ने कहा- कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते है। भाग्य को और दूसरों को दोष क्यों देना जब सपने हमारे है तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहियें। प्रियांशु प्रिया ने कहा- कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है, लोग तो पीछे तब आते है जब हम कामयाब होने लगते है। छोड़ दो किस्मत की लकीरों पे यकीन करना, जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज़ है। सरोज सिंह ने कहा- संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनिया उसके साथ होती है। जिस जिस पर ये जग हँसा है उसी उसी ने इतिहास रचा है। मौके पर भारती विद्यापीठ की दिशा कुमारी व डीएवी की आराध्या प्रिया ने कविता पाठ किया।

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