अमर शहीद खुदीराम बोस शहादत दिवस पर व क्रांतिकारी कवि गोपाल सिंह नेपाली जयन्ती पर याद किये गये ।



स्थानीय राहुल अध्ययन केन्द्र में अमर शहीद खुदीराम बोस शहादत दिवस पर व क्रांतिकारी कवि गोपाल सिंह नेपाली जयन्ती पर याद किये गये । दोनो विभुतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर सादे समारोह संपन्न हुआ । मौके पर जनवादी चितक धनंजय प्रसाद ने विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि खुदीराम बोस सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे , जिन्हे आजादी की लड़ाई में फांसी पर चढ़ाया गया । लेकिन विडंबना यह कि ऐसे शहीदो को आजादी की 75 वीं साल के वाबजूद आज तक उन्हें शहादत का दर्जा तक नही मिला है । जबकि इन्हीं शहीदों के बूते आजाद हवा में सांस ले रहे है । देश के लिए मर मिटने वालो को यहां उचित सम्मान तक नही मिलता है । ऐसे में भला नयी पीढ़ी कैसे सामने आयेगी ? उन्होनें गीतकार गोपाल सिंह नेपाली जी की चर्चा करते हुए कहा कि नेपाली जी एक क्रांतिकारी प्रवृति के कवि व गीतकार थे । वे समाज व व्यवस्था परिवर्तन के पक्षधर थे और शोषण से मुक्ति के लिए संघर्ष की बात करते थे । इसके अलावे सुखदेव , निसार आदि कई लोगो ने श्रद्धासुमन अर्पित किये ।

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