दशवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा के सफल विद्यार्थी हुए सम्मानित



देवघर : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले दशवीं एवं बारहवीं के सफल विद्यार्थियों को विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, घोरमारा उच्च विद्यालय के शिक्षक प्रणव कुमार, रेड रोज प्लस टू स्कूल के शिक्षक गोवर्धन पॉल, जूनियर गेस्ट्स रितु कुमारी, आयुषी अन्या एवं राजनन्दनी के करकमलों से सम्मानित किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार संत फ्रांसिस स्कूल के सुमित मजूमदार, अस्किनी आनंद व आध्या अग्रवाल, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल की आर्या झा, तृप्ति कुमारी, अंशु कुमार, मिश्रा रेसिडेंशियल पब्लिक स्कूल के आदित्य आनंद, नेहा सूर्या, आर्या सिंह, दीनबन्धु उच्च विद्यालय की शिल्पा कुमारी, इंडियन पब्लिक स्कूल के निशांत कुमार, पथरड्डा उच्च विद्यालय के आलोक कुमार राय, मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की मानसी कुमारी शर्मा, नेहा कुमारी, सेजल कुमारी, देवघर महाविद्यालय के सुमित मेहरा व प्रिंस कुमार भगत, तक्षशिला विद्यापीठ की रूपसा चटर्जी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय के सूरज कुमार, बिनीता कुमारी, मानसी श्रीवास्तव, साक्षी कुमारी, सागर कुमार, गौरव कुमार, रेड रोज स्कूल के नयन पॉल को अतिथियों ने सम्मानित किया। साथ ही दिल्ली पब्लिक स्कूल, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के यशस्वी कुमार को 95 प्रतिशत से अधिक लाने हेतु पद्मश्री सत्यजीत राय स्मृति प्रोत्साहन पुरस्कार से अलंकृत एवं विभूषित किया गया। मौके पर डॉ. देव ने कहा- हमारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य है कि विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभा को तराशना एवं उन्हें उचित सम्मान प्रदान करना। इस वर्ष ऑस्कर पुरस्कार विजेता सत्यजीत राय की 100वीं जयंती के अवसर पर पंचानवे प्रतिशत एवं उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को उन्हीं की स्मृति से अलंकृत किया जा रहा है। रवि केशरी ने कहा- देवघर के विद्यार्थियों में भी काफी प्रतिभाएँ छिपी हुई है। हर क्षेत्र में यहाँ के विद्यार्थी अपनी पहचान बना चुके हैं। प्रणव कुमार ने कहा- मिहनत का फल सदा मीठा ही होता है। जो बच्चे परिश्रम करते हैं, वे हमेशा अगली पंक्ति में ही दिखते हैं। गोवर्द्धन पॉल ने कहा- सन 1994 से इस संस्था से जुड़ा हुआ हूँ। हमारा उद्देश्य ही है विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना। रितु कुमारी ने कहा- सतत प्रयास एवं अपने काम के प्रति सजग रहना विद्यार्थियों का कर्तव्य होना चाहिए। राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, आन्ध्र प्रदेश की छात्रा आयुषी अन्या ने कहा- जो विद्यार्थी सालभर मिहनत करते हैं, अनुशासन में खुद को रखकर पढ़ाई करते हैं, सफलता उन्हें चूमती है।

कोई टिप्पणी नहीं