बामनगामा में आज होगी दुबे बाबा की वार्षिक पूजा।



सारठ प्रखंड क्षेत्र में स्थित, अतिप्राचीन बामनगामा बिशहरन  दुबे बाबा से प्रसिद्ध  बाबा दुबे की वार्षिक पूजा  आज  सावन माह के पवित्र महीने में होगी।  पूजा का सारा खर्च बामनगामा  ठाकुर स्टेट के परिवार द्वारा किया जाता है।हलाकि कोरोना काल को लेकर इस बार मेला का आयोजन नही किया जायेगा ।सिर्फ वार्षिक पूजा किया जाएगा।लोग खुद से ही कतारबद होकर बाबा दुबे को जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते देखे जाते हैं । साथ  ही देवली गांव स्थित बाबा दुबे की वार्षिक पूजा आज ही होगी।यहाँ वैष्णवी पूजा किया जाता है।  इस दिन   विभिन्न  गाँव के लोग जिनके घर मे गाय दूध देती ही  सभी दूध बाबा के यहाँ ले आते है व खीर प्रसाद बनाया जाता है।जबतक पूजा न  हो तबतक लोग दूध वाली चाय भी नही पीते है। बाबा दुबे के संबंध में एक लोक कथा के अनुसार आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व एक अत्याचारी खेतोरी राजा ने अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु दूबे के पूरे परिवार को समाप्त कर दिया। संजोग से उसी  परिवार के भानुकर दुबे उस समय अपनी नई   दुल्हन लेने के लिए ससुराल गए हुए थे ।भानुकर दुबे जब अपनी दुल्हन को लेकर वापस अपना घर लौट रहे थे तो उन्हें इस घटना की जानकारी गांव के बाहर उनके अभिन्न शिष्य  राजू धानुक से मिल गई। असहाय ब्राह्मण दुबे प्रतिशोध की भावना में जलते हुए आत्महत्या  कर ली जिसे देखकर उनके शिष्य परम् शिष्य राजू धानुक ने भी अपने प्राण त्याग दिए ।इस घटना के पश्चात भानुकर दुबे कि मृत आत्मा ने विषैले नाग के रूप में उग्र होकर उस अत्याचारी राजा एवं उनके पूरे परिवार को संहार करते हुए राजा के सवजाति का संहार करना शुरू कर दिया। विनाश का तांडव मचाते हुए बाबा दुबे बास्की नाथ धाम तक जा पहुंचे। जहां देवाधि महादेव स्वयं प्रकट होकर बाबा दुबे एवं उनके शिष्य सहित पूरे परिवार को मुक्ति प्रदान करते हुए उन्हें शांत किया तथा भगवान शंकर ने बाबा दुबे को अपनी ब्रह्म शक्ति मानव कल्याण में लगाने वो कहते हुए उन्हें अपना तेज प्रदान किया।  बाबा दुबे के  परम् भक्त   राजू जो धानुक जाती के थे ।बाबा दुबे  ने  भक्त  खुश तो भगवान खुश के की बात कही व  बाबा दुबे के वार्षिक पूजा के बाद पहले अपने भक्त राजू जो धानुक जाती के थे उन्हें प्रसाद ग्रहण को कहा था।जिसको लेकर आज भी बाबा दुबे के वार्षिक पूजा में उनका भक्त पहले प्रसाद ग्रहण  करते है ।आज भी बाबा दुबे के प्रति इस क्षेत्र के सभी वर्गों समुदायों में आस्था एवं श्रद्धा है बाबा दूबे अपने भक्तों श्रद्धालुओं को बिच्छू एवं विषैले सर्पों से रक्षा करते हैं बाबा दुबे का नीर ही विषैले सर्पों से रक्षा करने में रामबाण का काम करता है ।

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