संस्कृत गीत प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी हुए पुरस्कृत



देवघर : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म तले संस्कृत दिवस सप्ताह के अंतर्गत आयोजित गीत व कविता प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को विनायक आर्ट गैलरी के सभागार में विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, मुख्य अतिथि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिवनी, मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षक लालबहादुर राहंगडाले, प्रगतिशील लेखक संघ, देवघर इकाई के अध्यक्ष प्रो. रामनन्दन सिंह, कला निकेतन के निदेशक राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े, नेशनल आई सी टी अवार्ड हेतु चयनित विवेकानंद मध्य विद्यालय की शिक्षिका श्वेता शर्मा एवं हैप्पी फ़ीट स्कूल की निदेशिका रेणु सिंह के करकमलों से पुरस्कृत किया गया। ज्ञात हो ग्रुप ए में राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति की छात्रा आयुषी अन्या को प्रथम, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल, देवघर की छात्रा आराध्या प्रिया एवं जसीडीह संत फ्रांसिस स्कूल के ऋतंजीत जाना को युग्म रूप से द्वितीय जबकि भारती विद्यापीठ, देवघर की छात्रा श्रुति कुमारी एवं पश्चिम बंगाल राज्य के हुगली जिले के रिषड़ा स्थित नवग्राम विद्यापीठ के छात्र आदित्य लाहिड़ी को युग्म रूप से तृतीय स्थान तथा एकलव्य पब्लिक स्कूल के आदित्य राज, विवेकानंद मध्य विद्यालय की आकांक्षा कुमारी व भारती विद्यापीठ की रिशु प्रिया को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। ग्रुप बी में फ्रीलांसर, नई दिल्ली की शिक्षिका शुभांगी तिवारी एवं मानव संसाधन, इनिशियाट्रिक्स टेक्नोलॉजीज, नोएडा की माधवी मधुकर को युग्म रूप से प्रथम, मध्यप्रदेश स्थित अरी, सिवनी, मध्यप्रदेश स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक लालबहादुर राहंगडाले एवं रमा देवी बाजला महिला महाविद्यालय की वितस्था केशरी को युगमरूप से द्वितीय जबकि एस.एल.एस.डी ए वी पब्लिक स्कूल, मौसम विहार, नई दिल्ली की शिक्षिका नेहा जग्गी तथा झारखंड राज्य के देवघर जिले के कुशमाहा, मधुपुर निवासी अदिति कुमारी को युग्म रूप से तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। मौके पर लालबहादुर राहंगडाले नेे कहा - संस्‍कृत भाषा अस्‍माकं देश्‍स्‍य प्राचीनतमा भाषा अस्ति। सर्वे प्राचीनग्रन्‍था: चत्‍वारो वेदाश्‍च संस्‍कृतभाषायामेव संति। प्राचीनकाले सर्वे एव भारतीया: संस्‍कृतभाषाया एव व्‍यवहारं कुर्वंत स्‍म। कालान्‍तरे विविधा: प्रान्‍तीया: भाषा: प्रचलिता: अभवन किंतु संस्‍कृतस्‍य महत्‍वम अधापि अक्षुण्‍णं वर्तते। मौके पर आयुषी अन्या, वितास्था केशरी, आराध्या प्रिया एवं ऋतंजीत जाना ने संस्कृत गीत की प्रस्तुति से खूब तालियाँ बटोरी। प्रो. रामनन्दन सिंह ने कहा- संस्कृत भाषा देववाणी कहलाती है। यह न केवल भारत की महत्त्वपूर्ण भाषा है अपितु विचारक उसे विश्व की प्राचीनतम व श्रेष्ठतम भाषा मानते हैं। डॉ. देव ने कहा- संस्कृत में मानव जीवन के लिए उपयोगी चारों पुरुषार्थों का विवेचन बड़े ही विस्तार से किया गया है। मार्कण्डेय जजवाड़े ने कहा- कुछ  समय  पहले कुछ पाश्चात्य विद्वानों द्वारा देश के  साहित्य को प्राचीनतम माना जाता था परन्तु अब सभी विद्वान् एक मत से संस्कृत के प्रथम ग्रंथ ऋग्वेद को सबसे  प्राचीन मानते है। श्वेता शर्मा ने कहा- संस्कृत  केवल धर्म प्रधान ही है ऐसा नहीं है, भौतिकवाद दर्शन से सम्बंधित विषयों पर भी प्राचीन ग्रंथकारों का ध्यान गया था। रेेणु सिंह ने कहा-प्राचीन भारतीय जीवन में धर्म को ही अधिक महत्व देने के कारण संस्कृत  धार्मिक दृष्टि से भी विशेष गौरव रखता है।

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