सारवां पीएचसी प्रभारी के खिलाफ निगरानी ब्यूरो से जांच करने की मांग



देवघर सारवां थाना के स परसोडीह निवासी धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारवां डॉ सुनील कुमार सिंह के विरुद्ध, महानिदेशक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के समक्ष परिवाद दायर कर डाक्टर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है । भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के द्वारा यह आवेदन स्वास्थ्य सचिव को भेजा गया तथा स्वास्थ्य सचिव ने उपायुक्त देवघर को जांच का आदेश दिया । उपायुक्त देवघर के द्वारा जिला परिवहन पदाधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया गया है । 

इस क्रम में जिला परिवहन पदाधिकारी के द्वारा वादी और आरोपी को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया जिस पर श्री धर्मेन्द्र कुमार सिंह के द्वारा अपना पक्ष रखते हुए सभी साक्ष्य आधारित आरोपों के सही होने की बात दोहराई गई ।श्री सिंह के द्वारा बताया गया कि उपायुक्त के द्वारा अब तक मामले का जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं भेजे जाने से आरोपी को मदद मिलने की संभावना है ।

ज्ञात हो कि बाइस बिंदुओं के आरोप में कई गंभीर आरोप लगाया गया है जिसमें सात वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर रहने  ,आवास भत्ता के गबन, कमीशन के चक्कर में गर्भवती महिलाओं का निजी क्लिनिक में जांच कराने,  बंध्याकरण में हजारों रूपए की दवा बाहर से मंगवाया जाना, अस्पताल में इलाज और जांच सहित सारे कार्य गार्ड और झाड़ूदार के द्वारा किया जाना, जरूरत से ज्यादा गार्ड और झाड़ूदार की बहाली, दर्जनों लोगों पर केश करने,  कर्मचारियों के खाते से राशि का अवैध निकासी, आयुष्मान योजना में फर्जी आपरेशन दिखा कर राशि की अवैध निकासी, सिविल सर्जन के लगातार औचक निरीक्षण में अनुपस्थित रहने और कई खामियां, जांच में पद के दुरूपयोग की बात साबित होने के बाद भी पद पर बने रहने, जांच में कर्मचारी को प्रताड़ित करने की बात साबित होने के बाद भी कारवाई नहीं होने, अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों की अवैध खरीद बिक्री, महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा, गर्भवती महिलाओं से पैसे की मांग, छेड़खानी करने,सहियाओं से पैसे की मांग,  पैसे के लोभ में गरीब नेत्रहीन अविवाहित किसान का नसबंदी करने का आरोप है और सभी आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी लगाया गया है । यदि सही से जांच हो तो डॉ सुनील कुमार सिंह को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता है । वहीं श्री सिंह ने कहा कि यदि भ्रष्ट चिकित्सक पर अविलंब कारवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय के समक्ष वाद दायर कर सजा की मांग करेंगे ।

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