इस्लाम मोहब्बत और शांति का पैगाम देने वाला मजहब है! 52 बीघा में आयोजित शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस से खिताब करते हुए बोले उलमा



मधुपुर 20 अगस्त : मधुपुर शहर के 52 बीघा स्थित वार्ड नंबर 15 में मुहर्रम उल हराम के नव्मी तारीख कि रात में एक अजीम उशान शहीदे कांफ्रेंस का महफिल का आयोजन यंग स्टार कॉमेटी की ओर से किया गया। इस मौके पर कई उलमा ए कराम और शायरों ने शिरकत की। इस मौके पर मुफ्ती नेशाब साहब मधुपुरी, मोहम्मद फिरोज रहबर, मो. अजमल मधुपुरी,मो.शाजिद हुसैन फैजी,नातखां सावन मधुपुरी, और इश्तियाक मधुपुरी ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम का आगाज कुरान ए पाक की तिलावत  करीम से मस्जिद के इमाम मोलाना मोहम्मद साजिद हुसैन फैजी ने अपनी सुनहरि आवाज से की। जनाब सावन  मधुपुरी और मोहम्मद इश्तियाक ने पहले मुर्हम के ताल्लुक से नातीया कलाम  से सभी का मन मोह लिया और इसके बाद मौलाना अजमल नुरी ने हजरत इमाम हुसैन की बयानात पर रोशनी डालते हुए कहा की आबयारी को अपना लहू दे दिया बागे श्याम को रंग व बू दे दिया! उन्होंने कहा इस्लाम   ईसार सब्र और मोहब्बत का पैगाम दिया है इस्लाम आपस में मिलजुल कर रहने का पाठ पढ़ाया सही रास्ते पर चलने का सबक सिखाया है इस्लाम ऐसी मजहब है जिसके रास्ते में चल कर हम एक इंसानियत का हसीन नमूना पेश कर सकते हैं यही इस्लाम का माने हैं! वही मुफ्ती निसाब साहब ने बताया कि माहे मोहर्रम में क्या हम सब के लिए  जायज है और क्या नाजायज है।  इसके बाद मौलाना साजिद हुसैन ने कहा यजीद पलीद हक परस्त  नहीं बल्कि बद परस्त था। इसलिए इमाम हुसैन ने कहा कि सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं वही खतीबे ईमाम कहा अब मेरे दिल से पूछये कहां कहां हुसैन है! जहां जहां हैं  मुस्तफा वहां वहां हुसैन है! शाह अस्त हुसैन बादशाह अस्त हुसैन हुसैन शासक है हुसैन सम्राट भी दिन अस्त हुसैन दीन पनाह अस्त हुसैन हुसैन जिन भी है और उसे बचाने वाला भी सर दाद दाद दस्त दर्द दस्त यदि हुसैन ने अपना सर भले दे दिया पर अपना हाथ उस को नहीं दिया देश दुनिया के मशहूर सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की उक्त पंक्तियां कर्बला के वाकिया और नवासे रसूल इमाम हुसैन कि इस्लाम में क्या है चाहते हैं यह बताने के लिए काफी है यही कारण है कि कहा जाता है। कतले हुसैन असल में मर गए यजीद हैं! इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद! इस्लाम में मोहर्रम महीने की खास अहमियत है इसी महीने में दसवीं मोहर्रम को योमें असुरा भी कहा जाता है इमाम हुसैन और उनके समर्थकों ने मैदान ए कर्बला में एक यादगार जंग लड़ी शहीद हुए दुनियाभर के मुसलमान अपने अपने अंदाज में मुहर्रम उल हराम मनाते हैं। रोजे रखते हैं कुरान खानी और मिलाद  इस माह में कराते हैं। मौके पर हाजी सुल्तान अहमद, यंग स्टार कमेटी के अरबाज अंसारी, शाहबाज अंसारी, रियाज अंसारी, नियाज अंसारी, शाहिद अंसारी, आशिक अंसारी, मोहम्मद वसीम, रजा मुराद, उर्फ सोना काशिफ अंसारी, सोनू अंसारी, इमामुद्दीन अंसारी, एजाज अंसारी यंग कमेटी वालों के सराहनीय कार्य रहा!

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