जल्द स्कूल नहीं खुला तो बच्चों के मानसिक व बौद्धिक क्षमता में आएगी कमी -दिनेश नाथ खवाड़े



देवघरः कोरोना महामारी मे स्कूल बंद होने के कारण बच्चों पर हो रहे दुष्प्रभाव की व्याख्या करते हुए देवघर शहर के जाने-माने वरिष्ठ शिक्षक  दिनेश नाथ खवाडे ने कहा कि समय कितना भी विपरीत क्यों न हो , मनुष्य अपनी क्षमता से उसे सुगम बनाने में सतत प्रयत्नशील रहता है। वर्तमान में पूरी मानव जाति कोरोना महामारी से जूझ रही है। कई महीनों तक सब कुछ बंद रहने के बाद कार्यालय, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बाजार आदि खुल चुके हैं, परंतु विद्यालय अभी भी बंद है। आर्थिक सक्रियता के दबाव के कारण लॉकडाउन को हटा तो दिया गया परंतु स्कूल नहीं खोले गए। इन दिनों स्कूल प्रबंधन ने अपने विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन शिक्षा पद्धति को अपनाया है। भारतीय शिक्षा प्रणाली में यह एक नया प्रयोग है। कोरोना ने जब भारत में दस्तक दी तब तक स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं खत्म हो गई थी और ये बच्चों समेत पूरे समाज के लिए राहत की बात थी। परंतु जब कोरोना का संकट गहराता गया और यह प्रतीत होने लगा कि यह अभी नहीं जाने वाला है तब बच्चों की शिक्षा को सक्रिय करने की योजना बनने लगी। ऑनलाइन शिक्षण द्वारा बच्चों को पुनः स्कूल व शिक्षकों से जोड़ा गया। पिछले 15-16 महीने से यह चल रहा है और अब इसके परिणाम भी कुछ कुछ दिखने शुरु हो गए हैं। लंबे समय से स्कूल बंद हो जाने के कारण बच्चों के दैनिक जीवन शैली प्रभावित हो रही है। देर से सोना, देर तक सोना, कुछ भी समय से नहीं करना आदि जैसी प्रवृतियां बढ़ती जा रही है। जाहिर सी बात है घर के अभिभावक भी बच्चों के इन व्यवहारों से खुश नहीं है। कोरोना के खौफ के साथ-साथ बच्चे की बदलती प्रवृति भी उन्हें चिंतित कर रही है। श्री दिनेश ने यह भी कहा कि बच्चों का बौद्धिक विकास थम सा गया है जो स्कूल आने के क्रम में बरकरार रहता था । बच्चे स्कूल आकर केवल पाठ्यक्रम आधारित चीजे ही नहीं सीखते थे बल्कि स्कूल आने से उन्हें अनुशासन, बोल चाल की भाषा, रहन सहन के साथ-साथ उन्हें अन्य चीजों का भी ज्ञान होता है। एक समय 50 बच्चों के साथ खुद को अनुशासित रखना और समय-समय पर परीक्षा और क्लास टेस्ट जैसी प्रतिस्पर्धा का अनुभव भी बच्चों को मिलता था इसके साथ ही लिखने और पढ़ने की क्षमता भी बच्चों में कम होती जा रही है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही अगर स्कूल को नहीं खोला गया तो भविष्य में बच्चों के मानसिक और बौद्धिक क्षमता में भी कमी आएगी।

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