मथुरापुर गांव में मनाई गई महान शिक्षाविद श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती।



देवघर- मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती मधुपुर विधानसभा के सिमरा मंडल के मथुरापुर गांव में मनाई गई तथा इस कार्यक्रम में पौधारोपण भी किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी  का जन्म आज ही के दिन सन् 1901 में कलकत्ता के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् सर आशुतोष मुखर्जी के यहाँ हुआ। उन्होंने 1921 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की, 1923 में एम.ए. और 1924 में बी.एल. किया और कलकता उच्च न्यायालय में एडवोकेट हो गए। 1926 में इंग्लैंड चले गए और 1927 में बैरिस्टर बन कर लौटने पर वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में विश्व के सबसे कम उम्र के कुलपति बनाये गए। तत्पश्चात् 1939 में स्वेच्छा से आजादी की अलख जगाने के लिए राजनीति में प्रवेश किया, परंतु गाँधीजी व कांग्रेस की नीति, जिससे हिन्दुओं को हानि उठानी पड़ी थी, के विरोधी बने। उन्होंने कहा "वह दिन दूर नहीं जब गाँधीजी की अहिंसावादी नीति के अंध- अनुसरण के फलस्वरूप समूचा बंगाल पाकिस्तान का अधिकार क्षेत्र बन जाएगा।" इन वजहों से उन्हें संकुचित सांप्रदायिक विचार वाला समझा जाने लगा। 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में गैर-कांग्रेसी वित्त मंत्री बने और चितरंजन रेल इंजन कारखाना, विशाखापट्टनम जहाज कारखाना एवं बिहार में खाद कारखाने स्थापित करवाए। हैदराबाद निजाम को भारत में विलय करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। फिर 1950 में भारत सरकार की अहिंसावादी नीति के विरोध में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर संसद में विरोधी पक्ष बन गए। एक देश में दो झंडे-दो निशान की वजह से कश्मीर का भारत में विलय के लिए जम्मू की प्रजा परिषद पार्टी के साथ मिलकर आंदोलन छेड़ दिया। 8 मई 1953 को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर वहाँ की सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए और जेल में ही 23 जून 1953 को रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई। इस कार्यक्रम में जिला की ओर से कार्यक्रम प्रभारी सचिन सुलतानिया मंडल अध्यक्ष सौरभ सिंह दिगम्बर पाण्डेय विनोद जादव अमर सिंह सुभाष टुडु मोना लाल टुडु भोला टुडु आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे

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