राष्टीय शिक्षक पुरुस्कार के लिए शिक्षक धीरेंद्र कुमार भारती के नाम का प्रस्ताव



देवघर।राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2021 हेतु जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा रिखिया के जीव विज्ञान व रसायनशास्त्र  शिक्षक  धीरेंद्र कुमार  भारती का नाम का प्रस्ताव भेजा गया है।ज्ञातव्य को की कारोंना के पहली लहर में मुहल्ला कक्षा एवं दुसरी लहर में ऑनलाइन कक्षा जो नए नवाचार के साथ इन्होंने शुरू किया।यह कार्य आज जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।विद्यालय स्तर पर भी इनकी विशिष्ट पहचान रही हैं, जहाँ इस कोविड काल मे  इनकी कार्यशैली देवघर के शिक्षको को भी प्रेरित करने का कार्य किया।वही पर्यावरण संरक्षण, वेक्सीन के प्रति जागरूकता अभियान, बाल विवाह के प्रति अभिभावकों को जागरूक करने का कार्य किया। वहीं आज इनके कार्य फलस्वरूप रिखिया विधालय का रिजल्ट, एवं छात्रों के नामंकन में भी वृध्दि  देखने को मिली है।विद्यालय के परिवार और प्रभारी प्रधानाध्यापिका महोदया , अभिभावकों  के आशीर्वाद और प्यार के कारण धीरेंद्र भारती अपने सेवा के दो साल में ही इस मुकाम तक पहुँचे है। बातचीत के क्रम में शिक्षक धीरेंद्र भारती ने रिपोर्टर शेखर सुमन को बताया कि 3 जुलाई 2020 से शुरू हुई जब मैं पहली बार अपने छात्रों के साथ अन्य शिक्षक सुलेखा विश्वास के साथ छात्रों की प्रतिक्रिया लेने और ऑनलाइन अध्ययन के बारे में जानकारी प्राप्त करने गया।  उसी दिन हम अपने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों से मिले। अधिकांश बच्चों से पता चला कि उनके पास एंड्राइड मोबाइल सेट नहीं था,जिसके कारण वे छात्र ऑनलाइन कक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे थे, ऐसे में बोर्ड परीक्षा की ओर काफी ध्यान दिया गया।  उन बच्चों के दिमाग में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषय। डर साफ दिख रहा था, ये वो दौर था जब लोग कोरोना की शुरुआती स्टेज को लेकर काफी डरे हुए थे। तब मुझे समझ में आया कि हम दिन-रात ऑनलाइन क्लास में जो मेहनत कर रहे हैं उसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं तो मैंने आत्मनिरीक्षण किया और समाधान के तौर पर मोहल्ला क्लास शुरू की।  इसके बाद पहली बार उसी गांव में 4 जुलाई को मैंने अपनी मोहल्ला क्लास शुरू की और बच्चों के डर और झिझक को दूर करने के लिए मेहनत करने लगा। इस दौरान कोरोना ने पूरे देश को अपना भयानक चेहरा दिखा दिया।  लॉकडाउन में फंसे लोग इस तरह डर गए कि घर से बाहर भी नहीं निकले, मेरा परिवार भी मुझसे बहुत डरता था कि कोरोना काल में मैं बच्चों की इतनी क्लास लेने जा रहा हूं और उससे  संक्रमण होना ।  लेकिन अपने बच्चों की शंकाओं को दूर करने के बाद मुझे जो आत्म-संतुष्टि मिल रही थी, उसने मुझे यह महसूस कराया कि कोरोना काल में यह मुझमें किसी प्रकार की ऊर्जा विकसित कर रहा था जो मेरे लिए ईश्वर का उपहार या प्रतिरक्षा थी।  कोरोना से कभी डर नहीं लगा।  इस प्रकार बच्चों से कुछ उत्साहजनक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं।  हमारे विद्यालय की नई प्रभारी श्रीमती सुलेखा बिस्वास जब आश्वस्त हुईं तो उन्होंने मेरा उत्साहवर्धन किया।  उन्होंने लगातार मेरे काम की प्रशंसा की और हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और साथ ही मुझे प्रोत्साहित करने के लिए कई मोहल्ला कक्षाओं में मेरा साथ दिया और बच्चों से फीडबैक लिया फिर धीरे-धीरे मैं दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में चली गई जहां मोबाइल टावर या नेटवर्क ठीक से उपलब्ध नहीं था,  मैंने उन जगहों को टारगेट करके मोहल्लों में क्लास शुरू की।मैंने स्कूल के फेडर एरिया के करीब 10 किमी मोहल्ला क्लास लेना शुरू किया, ताकि जो भी बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं, वे इसका लाभ उठा सकें।  अगर ऑनलाइन कक्षाएं ही समाधान हो सकती हैं तो कोटा, दिल्ली, मुंबई जैसी जगहों पर बच्चे आमने-सामने पढ़ने के लिए बाहर क्यों जाएंगे?श्री भारती ने कहा कि स्कूल के पोषक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 40 से अधिक मोहल्ला कक्षाएं की हैं और आज जब मुझे हमारे जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, सभी आम शहरी नागरिक बच्चों के अभिभावक सहित सभी मीडिया भाइयों से अपार स्नेह मिलता है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं उन बच्चों तक पहुंचने में सक्षम हूं जिनके माता-पिता दूर-दराज के इलाकों से शहर में अपनी आजीविका कमाने के लिए आते हैं और उनके परिवार को कड़ी मेहनत करके और बच्चों के लिए स्मार्ट मोबाइल खरीदने में असमर्थ हैं। यह उन किसानों के बच्चे हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी जुटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वे आर्थिक रूप से पिछड़े और गरीब छात्र हैं, उनके पास निजी ट्यूशन के लिए भी पैसे नहीं हैं।  कोरोना काल में निजी कोचिंग, ट्यूशन भी बंद था।  कोरोना काल में मोहल्ला वर्ग का संचालन इतना आसान नहीं था क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब बच्चों के पास मास्क या हैंड सैनिटाइजर भी नहीं था तो ऐसे में मैंने अपने बच्चों के लिए मास्क और हैंड सैनिटाइजर की व्यवस्था खुद से की। उन्होंने कहा कि जेब से व्यवस्था करने के बाद में मोहल्ला क्लास चला पाया। मेरा उत्साह और भी दुगना हो गया जब मेरे शहरवासियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों के अलावा मेरे जिले के उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी और राज्य शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष और  सभी शीर्ष अधिकारियों को भी पहचाना और सराहा गया।  ट्विटर, फेसबुक और विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे काम की व्यापक प्रशंसा हुई, जिससे मेरा उत्साह काफी बढ़ा।इस कोरोना काल में, पढ़ाने के लिए जगह ढूँढना एक बहुत ही गंभीर समस्या थी, तब मुझे याद आया कि अतीत में, जब गुरुजी छात्रों को आकाश के नीचे प्रकृति की गोद में पेड़ों की छाया के नीचे पेड़ के नीचे पढ़ाते थे,तो यह था  बात उन दिनों की है जब सरकारी स्कूलों में बड़े-बड़े भवन नहीं हुआ करते थे, लेकिन उन दिनों भी पढ़ाई बहुत सार्थक थी।  मैंने भी पेड़ के नीचे क्लास ली और तेज धूप में खेतों में और खलिहान में पेड़ के नीचे मोहल्ला क्लास लगाने लगा। बच्चों की प्रतिक्रिया उनके चेहरे पर आत्मविश्वास के रूप में झलक रही थी, अब मेरे बच्चे बोर्ड परीक्षा को लेकर बिल्कुल भी नहीं डरते।सरकार से निर्देश मिलने के बाद जब 21 दिसंबर से दसवीं और बारहवीं कक्षा के लिए स्कूल शुरू हुआ तो मैंने नौवीं कक्षा के लिए ही मोहल्ला की क्लास जारी रखी। मैंने निश्चय किया है कि एक बार टीकाकरण हो गया और सब कुछ ठीक हो जाएगा तो भविष्य में मैं घर-घर जाकर बच्चों के लिए "शिक्षा आपके द्वार" कार्यक्रम आयोजित करूँगा जिसमें मैं माता-पिता और बच्चों के साथ लगातार जुड़ा रहूंगा और हटा दूंगा  घर-घर जाकर हर विषय की शंका।  अब जब स्कूल आंशिक रूप से खुला है तो मैं कक्षा 9 के छात्रों के लिए मोहल्ला कक्षाएं ले रहा हूं।

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