कोरोना के चलते कुंडहित में सिर्फ पांच मीटर तक रथ खींच कर निभाई गई परंपरा, नहीं लगे मेले।



कुंडहित (जामताड़ा):दियों पुरानी परंपरा दूसरी बार कोरोना के कारण भगवान जगन्नाथ देव अपने मासी बाड़ी नहीं जा सके।प्रशासनिक स्तर पर अनुमति नहीं होने के कारण सोमवार को कुंडहित मुख्यालय के दोनों मंदिर एवं बनकटी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की रथ तो सज धज कर तैयार हुई। लेकिन रथ का परिभ्रमण नहीं कराया जा सका। रथ परिभ्रमण नहीं होने के कारण दुसरी बार कुंडहित में रथयात्रा के दिन मेला नहीं लग पाया।बताते चलें कि कुंडाहित का रथ मेला जिला का सबसे बड़ा मेला है।रथयात्रा कुंडहित के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।

प्रखंड मुख्यालय में रथ यात्रा मेले के दिन विशेष गहमागहमी रहती है जहां दूरदराज से श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ देव का रथ को दर्शन करने एवं रथ को खींचने में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लेकिन कोरोना के कारण मेला नहीं लगने से  इसबार श्रद्धालुओं का आवागमन बहुत ही नगण्य रहा।मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भैया बलराम और बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना की।भक्तों की संख्या जरूर कम थी, लेकिन पूजा को लेकर होनेवाले जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

कुंडहित का रथ मेला आसपास के क्षेत्र में खासा चर्चित रहा है।लेकिन कोरोना वायरस की वजह से इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जा सका। वहीं मुख्यालय में भी स्थानीय भक्तगण ही पूजा अर्चना की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहे। बताते चलें कि कुंडहित मुख्यालय के अलावा प्रखंड के बनकाठी, बाबूपुर तुलसीचक में भी रथ यात्रा का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार वहां भी काफी सादगी के साथ रथ यात्रा की परंपराओं का निर्वहन किया गया।कुंडहित प्रखंड में पॉंच स्थानों पर रथयात्रा निकाला जाता है. वही नियम के तौर पर पाँच मीटर तक रथ को लाया गया फिर वापस घुमा लिया गया।

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