सुरेखा सीकरी की पहचान टीवी पर एक कड़क सास के रूप में थी : डॉ. प्रदीप

 


देवघर : स्थानीय ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने सुरेखा सीकरी की मृत्यु पर शोक जताते हुए उनके सन्दर्भ में कहा - सुरेखा सीकरी को आज फ़िल्मी और टेलीविजन के जगत में हर कोई जानता है। वे टेलीविज़न जगत की मशहूर कलाकर में से एक थीं जिन्होंने अपनी कला के दम पर 70 के दशक से लेकर 80 के दशक तक कई बड़े और जाने माने एक्ट्रेस और बड़े लोगों के संग काम किया और लोगों के बीच में अपनी पहचान बनाई। उनकी मृत्यु ह्रदय घात के कारण 16 जुलाई 2021 को मुंबई में हुई। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत एक भारतीय थिएटर, फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री के रूप में की। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कॉलेज की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने टीवी और फ़िल्मों में आने की सोची। वे हिंदी रंगमंच की एक अनुभवी कलाकार रही है, उन्होंने कई टीवी शो में काम किया है और टीवी जगत में अपना नाम कमाया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1978 राजनीतिक ड्रामा फिल्म किस्सा कुर्सी से की थी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी और मलयालम फिल्मों में सहायक भूमिकाओं में भी काफी काम किया है। भारतीय टीवी धारावाहिकों और फ़िल्मों में काम करने के चलते उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले हैं। उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता बालिका वधू में उनके काम के लिए 2008 में मिली थी, इसमें उन्होंने एक सास का किरदार निभाया था, जिसके बाद उन्हें घर-घर में एक नई पहचान मिली थी। इस शो में उन्होंने एक नकारात्मक भूमिका में किरदार निभाया था।इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए इंडियन टेली अवार्ड से सम्मानित किया गया और 2011 में बालिका वधु नाटक के लिए सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का इंडियन टेली अवार्ड द्वारा भी उनका सम्मान किया गया।उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों में 1986 में आई ‘तमस’, 1991 में ‘नजर’, 1996 में ‘सरदारी बेगम’, 1999 में ‘सरफरोश’, साल 2004 में आई फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ शामिल हैं। इसके साथ ही कई बेहतर टीवी नाटकों में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है। हिंदी रंगमंच में उनके योगदान के लिए 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जीता। उनकी आखरी फिल्म 2018 में आयी बधाई ही थी, जिसे दर्शको द्वारा काफी पसंद किया गया था। उन्हें अन्य अभिनेत्री की तुलना में तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तमस, मम्मो और बधाई हो में अपनी भूमिकाओं के लिए दिया गया था। इसके साथ ही उन्हें अन्य प्रशंसाओं में एक फिल्मफेयर पुरस्कार, एक स्क्रीन पुरस्कार और छह भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार शामिल हैं।

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