चितरा कोलियरी के काले हीरे ने कोयला माफियाओं को बनाया हीरो।



देवघर- काले हीरे ने कोयला माफियाओं को बनाया हीरो, जिनकी कमाई ने नगर निगम के बजट को भी पीछे छोड़ दिया है। देवघर जिले के चितरा ईसीएल कोलियरी की खदानों से हर रोज करीब 350 हजार टर्न  कोयला निकलता है। लेकिन इसका करीब 10 से 11 प्रतिशत यानी 350 टन से ज्यादा अवैध रूप से निकाल लिया जाता है या चोरी कर लिया जाता है। तकरीबन 5000 रूपए प्रति टन के हिसाब से इस कोयले की कीमत 30 लाख रुपए आँकी जा रही है। यानी साल में करीब 150 करोड़ पचास लाख का सामराज्य है। 3.50 हजार टन हर रोज कोयला का डिस्पैच होता है। जिसका 10 से 11 परसेंट कोयला माफिया अवैध रूप से ट्रक में फलों के ड्रम में कोयला छुपा कर, डिस्पैच कर चोरी-छुपे बेचते हैं। चौंकाने वाली बात है कि चितरा कोलियरी में अवैध कोयला माफिया की सालाना कमाई देवघर की शहरी सरकार यानी नगर निगम के बजट से भी ज्यादा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कोयला माफिया यहाँ सरकार से भी ज्यादा समृद्ध है। कोयला चोरी एवं अवैध खनन की बात दबे आवाज में ईसीएल के अफसर भी स्वीकारते हैं, लेकिन ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहना नहीं चाहते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वैध तथा अवैध खदानों से कोयला माफिया हर रोज वारा-न्यारा करने में लगे हुए हैं। माफिया अपने घरों में चार से पांच डंपर रखे हुए हैं और डंपर के आगे पीछे किसी भी तरह का नंबर तक अंकित नहीं है। शाम होते ही सभी डंपर कोयला लोडिंग में लगा दिया जाता है और रात के तकरीबन 1:00 बजे जामताड़ा रोड स्थित बांधी केंन्द से रवाना किया जाता है तथा चितरा, सारठ, पथरोल एवं मधुपुर थाना होते हुए गिरिडीह स्थित फैक्ट्री तक पहुंचा दिया जाता है।

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