शिवगंगा स्थित श्रीगणेश कला मंदिर की बढ़ेगी गतिविधियां पांच सदस्यीय आजीवन न्यास समिति का हुआ गठन

 


देवघर 19 जुलाई: शिवगंगा तट स्थित श्रीगणेश कला मंदिर में अब वार्षिक पूजन समेत तमाम पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में समिति को सक्रियता प्रदान करने हेतु 18 जुलाई को पूर्व मंत्री कृष्णानंद झा ने पहल की है।श्री झा ने समाज की चौथी पीढ़ी को जोड़ने का काम करते हुए इसका स्वरूप व्यापक करने का कार्य किया। इस क्रम में जहां एक ओर पांच सदस्यीय आजीवन न्यास समिति(ट्रस्टी) का गठन किया है,वहिंसामिति के आठ पदाधिकारी व दस कार्यकारिणी सदस्यो का चयन किया। इसी बीच सोमवार को श्रीगणेश कला मंदिर के नवगठित समिति के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन का आइजन कर समिति के विस्तारीकरण पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला। समिति के मुताबिक सन 1915 ई.में कंठा समाज जिन्होंने में बाद में सन 1933 ई.में श्रीबालगुद्दर समिति का गठन किया। जो कालांतर में श्रीगणेश कला मंदिर के रूप में रूपांतरित हुआ। पहली पीढ़ी से चलकर दूसरी व तीसरी पीढ़ी तक आते-आते यह निष्क्रिय होने के कगार पर आ चुका था। फलस्वरूप पूर्व मंत्री कृष्णानंद झा ने पहल करते हुए तीसरी पीढ़ी को सक्रियता प्रदान करने की सार्थक पहल की। साथ ही उन्होंने समिति के बेहतर भविष्य के लिए चौथी पीढ़ी को भी जोड़ने का बेहतर कार्य किया। नतीजतन समिति के सारे पदाधिकारी व सदस्य अब श्रीगणेश कला मंदिर की पूजन कार्यक्रम को बेहतर ढंग से आयोजित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर समिति के श्री दुर्लभ मिश्र,मोतीलाल द्वारी,बिनोद दत्त द्वारी,पन्नालाल मिश्र,मुन्नीलाल भगत,शांति श्रृंगारी,कार्तिक कुमार झा,हिमांशु झा आदि मौजूद थे।


नवगठित आजीवन सदस्य(ट्रस्टी)

-----------------------------------------

सर्वश्री कृष्णानंद झा

डॉ. मोतीलाल द्वारी

शिवनाथ सरेवार

 दुर्लभ मिश्र

 मुनिलाल भगत


पदाधिकारीगण

-------------------

अध्यक्ष: डॉ.मोतीलाल द्वारी

उपाध्यक्ष:  शिवनाथ सरेवार,डॉ. अनिल कुमार झा, राजा मिश्र

सचिव:  पन्नालाल मिश्र

उपसचिव:  सर्वेश्वर दत्त द्वारी, हिमांशु झा।

कोषाध्यक्ष:  प्रकाश भारद्वाज


कार्यकारिणी सदस्य

--------------------------

रामनाथ नरौने,सर्वेश्वर पलिवार,दिवाकर नरौने,बिनोद दत्त द्वारी,रमेश चरण द्वारी,प्रमोद श्रृंगारी,राजू श्रृंगारी,श्याम नारायण पलिवार उर्फ बेदी,अजित नारायण खवाड़े,जय नारायण श्रृंगारी।

कोई टिप्पणी नहीं