चुनौती को अवसर में बदल कर आत्मनिर्भर बनना विद्यार्थियों की पहली प्राथमिकता : डॉ विजय




देवघर सातर रोड स्थित गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल भंडारकोला देवघर के नए प्राचार्य डॉ विजय कुमार ने पदभार संभालते  ही सबसे पहले अपने विद्यालय के छात्र छात्राओं को कोरोना काल में मानसिक अवसाद  एवं वर्चुअल क्लासेस की परेशानियों से बचाव हेतु कई निर्देश जारी किए हैं। इस अवसर पर प्राचार्य ने कहा कि 'आंखों देखा न कानो सुना' कहावत को चरितार्थ करने वाले वैश्विक महामारी जिसने संसार के लगभग सभी देशों के विकास की गति को अवरुद्ध कर रखा है, ऐसी विकट वैश्विक विप्लव की विषम परिस्थिति में सबसे अधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र है शिक्षा जहां किसी भी देश के भविष्य के ताने-बाने बुने  जाते हैं। लगभग 18 - 20 महीनों से विद्यालयों के दरवाजे को अटूट तालों से जकड़ दिया गया है जिसके खुलने के आसार अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा। ऐसे वैश्विक विप्लव की स्थिति में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को वर्चुअल शिक्षा पद्धति पर निर्भर होने के लिए मजबूर कर दिया गया। परिस्थिति कुछ ऐसी दुविधाजनक है कि क्या किया जाए । बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देने के लिए उन्हें विद्यालयों में पढ़ाया जाए या उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा को देखते हुए घरों में रखा जाए।

ऐसी अकल्पनीय स्थिति में विद्यालयों के द्वारा संचालित ऑनलाइन पढ़ाई को  तरजीह देना विवशता और आवश्यकता दोनों है। चुनौती को अवसर में बदलकर आत्मनिर्भर बनना विद्यार्थियों की की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अतः वर्तमान परिपेक्ष में यह जरूरी है कि छात्र अपनी दिनचर्या को व्यावहारिक तरीके से प्लान करें। सुबह जल्दी उठने की आदत डालें। नियमित योग व व्यायाम एवं खानपान पर ध्यान रखें। हेल्थी खाएं और जंक फूड से बचें। पेय या तरल पदार्थ का सेवन ज्यादा  करें। ऑनलाइन पढ़ाई निश्चित समय पर करें। अध्ययन समय सारणी का नियमित रूप  से पालन करें। समय सारणी में खेलना व टीवी देखना भी शामिल करें परंतु लंबे समय तक टीवी , लैपटॉप या मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचें। अभिभावक को चाहिए कि बच्चों को 'लूडो' या 'कैरम' जैसे खेल के प्रति प्रेरित करें।अपने व्यवहार को नियंत्रण में रखें। महामारी के बारे में ना ज्यादा पढ़े ना ज्यादा सुने। तनाव होने पर अपने परिवार के लोगों एवं दोस्तों से बात करें। खाली समय में बच्चों को क्राफ्ट जैसी गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। अच्छी नींद के लिए सोने से पहले मेडिटेशन व योग अवश्य करें। विद्यालय में होने वाली सह पाठयक्रम गतिविधियां एवं शिक्षकों से हमेशा जुड़े रहे। पढ़ाई में कोई भी परेशानी होने पर सीधे अपने शिक्षकों से बात करें। शिक्षकों और अभिभावकों के द्वारा दिए गए निर्देशों का दृढ़ता पूर्वक अनुपालन करें। छोटे-छोटे बच्चों को माता-पिता और अभिभावकों के द्वारा जागरूक बनाए रखना उनके उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है

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