आदिवासी हुल जूमिद गांवता सामाजिक संगठन की ओर से 166वां सिद्धू- कानहु मुर्मू हूल दिवस सादगी के साथ मनाया गया!



मधुपुर पथलचपटी स्थित मातृका मोड़ पर आदिवासी हुल जूमीद गांवता सामाजिक संगठन की ओर से  पद्मिनी मुर्मू के नेतृत्व में 166वा सिद्धू- कानहु मुर्मू हूल दिवस विश्वव्यापी कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए पौराणिक परंपरा के साथ मनाया गया। इस हुल दिवस पर उक्त सामाजिक संगठन के साथ साथ आदिवासी अखाड़ा पसिया मधुपुर के सदस्य भी शामिल हुए। उक्त दोनों सामाजिक संगठन के अनुभवी एवं समाज सेवी  पद्मिनी मुर्मू  भुवनेश्वर कॉल ने विशेष रूप से संथाल हूल 1855 ईसवी की इतिहास विस्तार पूर्वक बातों की रखी साथ ही स्थानीय लोगों ने भी बारी-बारी से विचार को रखा विशेष रूप से स्थानीय लोगों का कहना है कि विगत 30- 35 वर्षों से भी हमारे महान वीर शहीद सिद्धू कानहु मुर्मु की प्रतिमा कोई भी राजनीतिक दलों के द्वारा अभी तक स्थापित नहीं किया गया है जो घोर निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण की बात है। विद्यमान प्रखंड स्तरीय तमाम समाजसेवी एवं कार्यकर्ताओं की मांग है कि यथाशीध्र उक्त स्थान में बहुमूल्य संगमरमर की मूर्ति प्रतिमा बनाया जाए इस हुल दिवस के अवसर पर संगठन के सदस्य  रूप राम सोरेन, उबीलाल मुर्मू,  बसंती मरांडी, संजय बैश्रा, पूरण मरांडी, अविनाश हेब्रम, निताई सोरेन, गुंसी सोरेन,  बेरना तिर्की, बहामुनी हेंब्रम, एवं वर्तमान विधायक झारखंड सरकार के कल्याण मंत्री हफीजुल हसन उपस्थित थे!

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