वार्ड संख्या 14 एवं 20 में मलेरिया सर्वे सह जांच कार्यक्रम चलाया गया।



देवघरः राज्य मुख्यालय, झारखंड, रांची द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के आलोक में डॉ०जुगल किशोर चौधरी - सिविल सर्जन सह जिला भीबीडी पदाधिकारी के निर्देशानुसार डॉ गणेश कुमार- जिला भीबीडी कंसल्टेंट, देवघर के नेतृत्व एवं अनुश्रवण में देवघर नगर निगम के शहरी क्षेत्रों के वार्ड संख्या 14 एवं 20 एवं सभी प्रखंडों के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत घर-घर जाकर दिनांक 15 जून 2021 से डेंगू- चिकनगुनिया सर्विलेंस के साथ कंटेनर्स सर्वे शहर जागरूकता अभियान तथा दिनांक 15 जुलाई 2021 से मलेरिया फीवर सर्वे सह जांच कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सभी सीएचसी में वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के नेतृत्व में यह द्वय कार्यक्रम चलाया जा रहा है। देवघर शहरी क्षेत्रों में चार कम्युनिटी वॉलिंटियर्स के द्वारा यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसमें नगर निगम के द्वारा भी लार्वानाशी छिड़काव कार्य में सहयोग किया जा रहा है। इसके तहत लोगों को बताया जा रहा है कि यह वैक्टर जनित बीमारियां (मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जिका वायरस, फाइलेरिया एवं जेई या चमकी बुखार) अलग-अलग प्रजातियों (क्रमश: एनाफिलीज एडिस एवं क्युलेक्स) के संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से अलग-अलग वैक्टर जनित रोग फैलती है। जो ठहरे हुए साफ एवं गंदे जमे हुए पानी में अपने अंडे देती है। बरसात के मौसम में एवं इसके बाद जगह-जगह गड्ढों या बेकार पड़े बर्तनों, टायरों, नारियल के कोपरे, पेड़ों में बने खोह, प्लास्टिक कप, छप्परों, फूलदान, गमले, फ्रिज ट्रे, कूलर, छत पर खुले पानी की टंकी या सैप्टिक टैंक, चापानल एवं कुआं आदि के पास बने गड्ढों में सप्ताह दिन या इससे ज्यादा दिन तक जल जमाव होने के कारण मच्छरों को अपने अंडे देने के लिए अनुकूल वातावरण और घर मिल जाता है जिस कारण इनकी संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो जाती है और बड़े होकर यही मच्छर संक्रमित होने के उपरांत उपरोक्त वेक्टर जनित रोगों को सहज रूप से फैला देती है। जिससे जानमाल के साथ आर्थिक हानि होने की प्रबल संभावना होती है। अतः लोगों को सीधे तौर पर जागरूक किया जा रहा है कि अपने घर तथा आसपास कहीं भी जलजमाव नहीं होने दें। प्रत्येक सप्ताह (रविवार को) अपने घर तथा आसपास का 10-20 मिनट का समय देकर जरूर अवलोकन करते रहें तथा जहां भी जलजमाव दिखें उसे अविलंब सुखा देना चाहिए और यह क्रिया प्रत्येक सप्ताह करते रहना चाहिए। जिससे मच्छरों को अपने प्रजनन स्थल नहीं मिल पाएंगे और इनकी संख्या में वृद्धि नहीं हो पाएगी। इससे यह वैक्टर जनित रोगों को नहीं फैला पाएंगी। अर्थात "मच्छरों से बचना ही इन बीमारियों से बचने का सरल उपाय है।" मच्छरों के बाइटिंग से बचें। इसके लिए सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें, शरीर को पूरी तरह से ढ़ंकने वाले कपड़ों का प्रयोग करें, खासकर बच्चों एवं गर्भवती माताओं पर विशेष ध्यान दें। शाम के समय एवं सूर्योदय के समय मच्छर खून पीने हेतु ज्यादा सक्रिय रहती हैं। इस समय घर के सभी दरवाजे खिड़कीयां अवश्य बंद कर दें, हो सके तो दरवाजे खिड़की में जाली लगवा दें। जिससे मच्छर घर में प्रवेश ही नहीं कर सके। घर के आसपास हमेशा सफाई बनाए रखें। चुंकि मच्छर शाम के समय अपना आशियाना ढूंढती है इसलिए शाम के समय एक-दो घंटों के लिए मच्छरों रोधी क्रीम, क्वायल या लिक्विड का प्रयोग करें ताकि मच्छर घर में प्रवेश की नहीं कर सके। सारी रात यह जलाने या धुआं करने से बचना चाहिए ताकि स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव नहीं पड़े। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि बड़े जलजमाव वाले स्थानों में जला हुआ मोबील या किरोसन तेल डाल देने से भी मच्छर के लार्वा मर जाते हैं, जिनसे इनकी संख्या में वृद्धि नहीं हो पाती है।

चार कम्युनिटी वॉलिंटियर्स भगवती देवी, पम्मी देवी,  रिंकी कुमारी एवं पिंकी कुमारी ने देवघर नगर निगम शहरी क्षेत्रों के वार्ड संख्या 14 अंतर्गत श्रीकांत रोड, बेला बागान, बचपन प्ले स्कूल, पुराने पुलिस लाइन एवं काली मंदिर के आसपास तथा वार्ड संख्या 20 के अंतर्गत चंद्रशेखर ओझा पथ, सरदार पंडा लेन, सिंह दरवाजा, बाबा मंदिर के आसपास के गली तथा दुकानों आदि में यह अभियान सह कार्यक्रम चलाया गया। जिसका पर्यवेक्षण श्री प्रेमनाथ पांडे एवं डेगन यादव ने किया। सभी प्रखंडों में वहां के एएनएम, एमपीडब्ल्यू, सहिया दीदी एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा यह कार्यक्रम संपादित किया गया। जिसका पर्यक्षण वहां के मलेरिया तकनीकी पर्यवेक्षकों के द्वारा तथा अनुश्रवण संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा किया जा रहा है।

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