शादी के 10 वर्ष बाद भी बच्चा नहीं होने से तनाव में रह रहे आदिवासी मजदूर युवक ने फांसी के फंदे में झूलकर दे दी जान





सारठ : थाना क्षेत्र के जमुआसोल पंचायत के कुरुमटांड-चकनवाडीह 42 वर्षीय आदिवासी मजदूर युवक ने मंगलवार की अहले सुबह फांसी के फंदे में झूलकर आत्महत्या कर लिया है।घटना के संबंध में मृतक की पत्नी बहामुनि टुडु ने बताया कि सोमवार रात्रि को मृतक मजदूर युवक बुदिलाल सोरेन अपनी पत्नी के साथ रात्रि नौ बजे के करीब खाना-पीना खाकर एक ही कमरे में सोए थे। तभी मंगलवार अहले सुबह चार बजे के करीब जब पत्नी बहामुनि टुडु की नींद खुली, तो पति को बिस्तर पर नहीं देख हैरान हुई। पत्नी ने बाहर निकलकर देखा तो कहीं दिखाई भी नहीं दिया। जिसके बाद पत्नी पति की खोजबीन करने लगी। इसी बीच पत्नी को घर के दूसरे कमरे में लगा ताला खुला दिखा। जब पत्नी कमरे के अंदर गई तो अंदर का दृश्य देख अवाक हो गई। दूसरे कमरे में पति फांसी के फंदे में झूला हुआ था। हैरान पत्नी ने हो हल्ला करके घटना की जानकारी अगल-बगल के घर वालों को दिया और सभी ने आकर देखा कि बुदिलाल ने फांसी लगा लिया है। जिससे उनकी मौत भी हो चुकी है।इधर ग्रामीणों द्वारा घटना की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी करुणा सिंह भी पुलिस बलों के साथ मौके पर पहुंची। वहीं पुलिस द्वारा घटना की पूरी जानकारी लेने के बाद मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा करके उसे पोस्टमार्टम के लिए देवघर भेज दिया गया है। घटना को लेकर थाना प्रभारी करुणा सिंह द्वारा बताया गया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है, लेकिन फिर भी पुलिस घटना की बिन्दुओं पर जांच कर रही है। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी मामले का खुलासा होने की उम्मीद है। इधर घटना के बाद मृतक की पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं पंचायत की मुखिया सुन्दरमुनि हेम्ब्रम, ग्राम-प्रधान सुशील सोरेन व छातो मंडल समेत दर्जनों ग्रामीण घटना को लेकर दुखी थे और मृतक की विधवा को ढाढस बंधा रहे थे।

बच्चा नहीं होने से तनाव में रहता था मृतक युवक : कई ग्रामीणों का कहना था कि मृतक आदिवासी मजदूर युवक की शादी हुए 10 वर्ष हो चुके थे, लेकिन बाल-बच्चा नहीं होने से काफी तनाव में रहता था। बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व मृतक का बड़ा भाई महादेव सोरेन ने भी जहर खाकर मौत को गले लगा लिया था। जिसमें घटना का कारण दोनों भाई के भी नोंक-झोंक होना रहा था।बड़े भाई अपने पीछे पत्नी और चार पुत्र को छोड़ गये थे।

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