आयुष एसोसिएशन ऑफ झारखंड ने सात सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन का किया विस्तारीकरण।



देवघर- शनिवार को आयुष चिकित्सक द्वारा 7 सूत्रीय मांगों को लेकर चलाये जा रहे सांकेतिक आंदोलन का पाँचवा दिन था। 8 जून से लेकर 12 जून तक चलने वाला पाँच दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सफल माना जा रहा है। क्योंकि झारखंड के लगभग सभी जिलों के आयुष चिकित्सकों ने काफी बढ़ चढ़कर इस आंदोलन में भाग लिया। जिससे आयुष चिकित्सकों की मांगें सरकार तक पहुंच सकी। संघ के पदाधिकारियों द्वारा दिनांक 10/06/2021 को जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ तथा  पुनः दिनांक 11/06/2021 को सभी आयुष चिकित्सा पदाधिकारी एवं सम्मानीय सदस्यों के साथ ऑनलाइन बैठक किया गया एवं आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। जिसके तहत बहुमत से यह बात सामने आई कि वर्तमान  वैश्विक आपदा में जनहित तथा मानवता को ध्यान में रखते हुए कार्य बहिष्कार कर हड़ताल में जाना उचित नहीं एवं साथ ही आंदोलन को अन्य रूप में आगे ले जाने की सहमति प्रदान की गई एवं सक्रिय आंदोलन के लिए छूटे हुए आयुष चिकित्सकों को भी अपने साथ जोड़ने तथा एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए प्रयास करने की बात कही गई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आयुष चिकित्सकों के द्वारा दिनांक 13/06/2021 से 03/07/2021 तक आंदोलन को विस्तारित कर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिसमें सबसे पहले

1. "समर्थन जुटाओ अभियान" दिनांक 13/06/2021 से 03/07/2021 तक सभी जिला के संघ के सभी पदाधिकारी एवं सम्मानीय सदस्य अपने क्षेत्र के सभी सांसद, विधायक, सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के नेता तथा वरिष्ठ कद्दावर नेता से मिलकर अपनी मांगों को लेकर लिखित समर्थन प्राप्त करेंगे।

2. “कैंडल मार्च”-  दिनांक 25/06/2021 को पूर्व में संबंधित विभाग को लिखित सूचना देते हुए सभी जिला मुख्यालय में  जिसमें सभी आयुष चिकित्सक सिविल सर्जन कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय तक कैंडल मार्च करेंगे।

3. दिनांक 03/07/2021 को “भिक्षाटन” किया जाएगा। जिसमें सभी आयुष चिकित्सक अपने यूनिफॉर्म में प्रमुख चौक-चौराहों पर भिक्षाटन कर जनता एवं सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान आयुष एसोसिएशन ऑफ झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिग्विजय भारद्वाज, प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ मनोज कुमार मंडल, प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉक्टर कल्याण पंडित एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दीवाकांत पंकज ने जानकारी देते हुए कहा कि हमें आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि उक्त आंदोलन एवं कार्यक्रमों को एक दूसरे के सहयोग से पूर्णरूपेण सफल बनाया जाएगा। साथ हीं सरकार तक और भी सशक्त रूप में चिकित्सकों की माँगो को पहुँचा पाएँगे और सरकार की चिरनिद्रा भंग होगी।

कोई टिप्पणी नहीं