सुहागिनों ने पति की रक्षा और दीर्घायु के लिए किया वट सावित्री व्रत



देवघर।आज देवघर में ज्येष्ठ एकादशी के दिन वट सावित्री पूजा की गई जिसमें सुहागिन अपनी पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत बहुत ही श्रद्धापूर्वक करती है।जबकि एक पौराणिक कहावत है की सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा यमराज से की थी। सावित्री यमराज  से अपने पति का प्राण मांग कर ले आई थी ।इसी को देखते हुए हमारी भारतीय नारी इस परंपरा को निभाती है और आज के दिन वटवृक्ष की पूजा बहुत ही श्रद्धा पूर्वक अपने पति के लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं।सुहागिनों द्वारा आज वट सावित्री पर्व शहरी क्षेत्र , देवघर प्रखंड व जसीडीह सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़े धूमधाम, भक्ति और श्रद्धाभाव से मनाया गया। महिलाओं द्वारा बरगद पेड़ों के समक्ष विधिवत रूप से पूजा-अर्चना कर पति के लिए लम्बी उम्र की दुआ माँगी गयी। वेदों में वर्णित यह पर्व पति-पत्नी के बीच के श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक माने जाते हैं तथा हिन्दु धर्म में विशिष्ट स्थान रखते हैं। मान्यता के अनुसार इस व्रत को पुर्ण कर सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के जीवन को वापस लाकर पुनर्जीवित की थी।

सुहाग की रक्षा तथा संतान की प्राप्ति के लिए महिलाएँ उपवास रखकर, नए वस्त्र धारण कर सोलह श्रृंगार के साथ विधिपूर्वक बांस का पंखा, पूड़ी- पकवान, पांच तरह के फल, फूल, बेलपत्र, अक्षत् , कुमकुम, पीला सिन्दूर, मौली, दीपक, अगरवत्ती, लड्डू , ठेकुआ आदि के साथ वट वृक्ष के नीचे पूजा करती हैं। वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों का वास स्थान माना जाता हैं इसलिए महिलाएँ मंगल धागा बाँधते हुए परिक्रमा करती हैं तत्पश्चात एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।

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