योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन:डा.जे.पी. शूर



देवघर।डी.ए.वी निदेशक,(पी. एस.- I)डा. जे. पी. शूर,कालेज प्रबन्धकर्तृ समिति,नई दिल्ली ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 'योग' मात्र एक शब्द नहीं एक 'ऊर्जा' है। स्वस्थ जीवन व्यतीत करने की कला और विज्ञान है। योग आध्यात्मिक अभ्यास है जो शरीर और मस्तिष्क को अनुशासन सिखाता है। इसका उद्देश्य मन ,शरीर और आत्मा की एकता को अनंत क्षमता और आत्मज्ञान प्रदान करना है। योग और भारतीय संस्कृति एक दूसरे के पूरक हैं। योग संस्कृत के 'युज' शब्द से बना है जिसका अर्थ है' जोड़ना'। मन और आत्मा को जोड़ना अर्थात आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन। यह 5000 साल पुराना भारतीय दर्शन है। इसका उल्लेख प्राचीनतम पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद में मिलता है। भगवान शिव को योग के पिता की उपाधि दी गई है। भगवद गीता में योग का वर्णन है जिसमें कहा गया है कि व्यक्ति स्वयं से सहयोग करके मन को पूरी तरह से अनुशासित कर सभी इच्छाओं से स्वतंत्र होकर, जब केवल स्वयं में लीन हो जाता है तभी उसे योगी माना जाता है। सिंधु घाटी की सभ्यता में योगाभ्यास के चित्र प्राप्त हुए थे। महर्षि पतंजलि को आधुनिक योग का जनक माना गया है जिस का सर्वाधिक प्रचार स्वामी विवेकानंद जी ने किया। इस युग में योग को चार भागों में वर्णित किया गया है। ज्ञान योग ,भक्ति योग ,कर्म योग और राजयोग। योग का सकारात्मक प्रभाव इसकी लोकप्रियता का कारण है। इसे अपनाकर लोगों की जिंदगी पूर्ण रूप से बदल चुकी है। इसलिए कहा है:स्वस्थ और खुशहाल वही हो पाएगा जो अपने जीवन में योग अपनाएगा।

'जन-जन का यही है नारा'रोग मुक्त हो जीवन हमारा।योग की कला का जश्न मनाने के लिए एक विशेष दिवस की स्थापना का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर प्रस्तावित किया और 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया। इस विशेष अवसर को मनाने के लिए प्रस्तावित कुछ कारण हैं। 21 जून उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन है और इसे ग्रीष्मकालीन  अस्थिरता कहा जाता है। यह एक अवधि होती है, जो आध्यात्मिक प्रयासों का समर्थन करती है इसलिए योग की कला का अभ्यास करने की एक अच्छी अवधि माना जाता है। इस कारण 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा के तरफ से मान्यता दी गई। 2015 में पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया और भारत को विश्व योग गुरु कहा गया है। योग आसनों का अभ्यास शरीर में लचीलापन, मांसपेशियों को मजबूती और आत्मबल प्रदान करता है। योग को दिनचर्या में शामिल कर लेने मात्र से हम बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं। जहां वर्ष 2020 का थीम कोरोना महामारी  के कारण "सेहत के लिए, योग घर से योग"रखा गया था वहीं कोरोनावायरस की दूसरी  लहर के मद्देनजर वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का थीम योग के साथ रहें, घर पर रहें रखा गया है।  उपरोक्त थीम को महत्व देते हुए डॉ पूनम सूरी ,पद्मश्री अलंकृत प्रधान डीएवी कॉलेज प्रबंधकृत समिति नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर संदेश देते हुए कहा कि हम सभी को योग अपनाना चाहिए। उन्होंने सभी डीएवी संस्थानों में आभासी शिक्षा के दौरान प्रतिदिन योग करवाने, सभी कक्षाओं के छात्रों को योग के छोटे-छोटे आसनों को करने तथा महत्व बताने के लिए 25 से 30 मिनट की समय अवधि प्रतिदिन देना अनिवार्य किया। इस तरह उन्होंने वर्ष 2020 एवं 2021 के थीम को सार्थक रूप देते हुए योग को घर-घर तक पहुंचाने का सफलतापूर्वक कार्य किया। उनका यह कार्य बहुत ही प्रशंसनीय है।

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