पर्यावरण के द्वारा ही पृथ्वी पर जीवन संभव है : डॉ. प्रदीप



देवघर : आज दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। हर साल 5 जून के दिन दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करना है। आधुनिकता की दौड़ में भाग रहे प्रत्येक देश के बीच धरती पर हर दिन प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। जिसके दुष्परिणाम समय-समय पर हमें देखने को मिलते हैं। पर्यावरण में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने  से तापमान में भी तेजी देखी जा रही है तो कहीं कहीं पर प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण लंबे समय से बारिश भी नहीं हो पाती। मौके पर स्थानीय साइंस एंड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- प्रदूषण का बढ़ता स्तर पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसके कारण कई जीव-जन्तू विलुप्त हो रहे हैं। वहीं इंसान कई प्रकार की गंभीर बिमारियों का शिकार भी हो रहे हैं। इस दिवस की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ की और से स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जिसमें भारत की ओर से तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था। इस सम्मेलन के दौरान ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की भी नींव पड़ी थी। विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम 'पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली' है। जंगलों को नया जीवन देकर, पेड़-पौधे लगाकर, बारिश के पानी को संरक्षित करके और तालाबों के निर्माण करने से हम पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से पुनः जमा कर सकते हैं। पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, परि + आवरण। जिसमे परि का अर्थ है चारों ओर, और आवरण का अर्थ है घिरा हुआ अर्थात चारों ओर से घिरा हुआ। इसके अंतर्गत पेड़-पौधे, जीव-जंतु, वृक्ष आदि आते हैं यानी जो कुछ भी हमारे आस-पास है चाहे वह सजीव हो या निर्जीव सभी हमारे पर्यावरण से जुड़े हुए हैं। आज पृथ्वी पर जीवन संभव है इसका एकमात्र कारण पर्यावरण ही है। पर्यावरण पृथ्वी का एक अभिन्न अंग है।

लेकिन आज के समय में मानव पर्यावरण के महत्व को भूलता जा रहा है जिसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ पर पड़ रहा है प्राचीन समय में मानव मीलों की यात्रा पैदल ही कर लेता था लेकिन आज थोड़े दूर पैदल चलने में व्यक्ति की साँसे फूलने लगती है। प्राचीन काल में मनुष्य को प्रकृति द्वारा पूर्ण रूप से पौष्टिक सब्जियां, फल आदि प्राप्त होती थी और उसके सेवन से ही वह पूरे दिन ऊर्जा से भरे रहते थे और उन्हें पूरी उम्र कोई बीमारी नहीं होती थी लेकिन आज के समय में मनुष्य प्राचीन काल जैसी सब्जियां प्राप्त करने के लिए अनेक प्रकार की दवाईयों और कीटनाशकों लेता है जिसका सीधा प्रभाव उसके स्वास्थ पर पड़ता है क्यूंकि उसने जिस सब्जी या फल का सेवन किया है वह अब दूषित हो चूका है और उसमे जो पौष्टिक तत्व होने चाहिए अब वह उन दवाइयों के कारण उसमे नहीं बचे हैं। इसी कारण आज हर 10 में से 6 लोग कम उम्र में ही अनेक बिमारियों की चपेट में आ जाते है।

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