वूमेन ऑफ द एरा पुस्तक की कमाई से वृद्धाश्रम व अनाथालय खोलने की अभिलाषा



देवघर : सन 2019 में भारत सरकार के संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद के करकमलों से राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अपने शहर के डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव द्वारा इस लॉक डाउन की अवधि में स्वरचित काव्य संकलन 'वूमेन ऑफ द एरा' का प्रकाशन बहुत जल्द ही कोलकाता के एशियान प्रेस बुक्स द्वारा होने जा रहा है। अपने जन्मदिन, 18 जून के अवसर पर डॉ. देव ने कहा - चार वर्ष की उम्र में मेरे पिता ने वैराग्य लिया और सन 1997 को मेरी माँ भी उसी राह पर चल दी। बचपन से पितृहीन अनाथ की जिंदगी को बहुत नजदीक से देखा। माँ की ममता से भी बहुत जल्द वंचित हो गया। इसलिए तमन्ना थी कि मरने के पहले एक वृद्धाश्रम और अनाथालय खोलूँ जहाँ मैं सैंकड़ों माताओं की सेवा कर सकूं तथा असहाय विद्यार्थियों को पढ़ाकर नवोदय जैसे सरकारी विद्यालयों में दाखिला दिला सकूँ। इस पुस्तक से काफी उम्मीदें बनी हुई है। 2021 की यह लॉक डाउन मेरे लिए वरदान साबित होगा। तैंतीस दिनों में  विश्व की 200 महिलाओं का योगदान अंग्रेजी कविताओं में लिखने की हिम्मत की और इसमें बाबा बैद्यनाथ, माँ काली और माता सरस्वती से ईश्वरीय शक्ति प्राप्त हुई जिसके कारण इतने कम दिनों में इस पुस्तक को पूरी करने में सफलता मिली। ज्ञात हो डॉ. देव छातना राजगढ़, बाँकुड़ा, पश्चिम बंगाल एवं इसी राज्य के काशीपुर पँचकोटि राजबाड़ी के वंशज हैं जिन्होंने अपने जन्म के पहले ही छः भाइयों को भी खो चुका है। उनकी पुस्तक द बैद्यनाथ ग्लोरी, पारो की याद में, आर्टिस्ट्स ऑफ द नेशन, रामानुजन मैथेमेटिक्स फॉर्मूला फ़ॉर जूनियर्स, सी. वी. रमन साइंस डिक्शनरी, गुड़ इंग्लिश काफी चर्चित है। डॉ. देव को भारत गौरव, विद्यासागर, विद्या वारिधि, भारतीय कला सपूत, सरस्वती पुत्र, वाग्देवी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, भारतीय कला सपूत सम्मान, तुलसीदास राष्ट्रीय शिखर, स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय शिखर, बिरसा मुंडा ज्योति सम्मान के अलावा दर्जनों मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है। डॉ. देव ने इस पुस्तक का लोकार्पण किन्हीं राष्ट्रप्रधान से सम्पन्न कराने की इच्छा जाहिर की। पुस्तक में प्रायः सभी देशों की ख्यातिप्राप्त महिलाओं की देन को कविताओं में दर्शाई गई है। उन्होंने इस पुस्तक के प्रकाशन में अपने सभी विद्यार्थियों, शुभेच्छुओं के साथ-साथ श्यामनगर, पश्चिम बंगाल के करीबी मित्र राजर्षी भौमिक के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह पुस्तक जुलाई से अमेजन में उपलब्ध होगी। इस पुस्तक की रॉयल्टी और पुरस्कार राशि की पूरी रकम को वृद्धाश्रम व अनाथालय खोलने में व्यय की जाएगी।

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