दबे कुचले अल्पसंख्यको के भेदभाव. हेमंत सरकार ऐसे अधिकारियों पर कैसे लगाम:- जियाउल हक



मधुपुर 1 जून:  झारखंड में अल्पसंख्य दबे कुचले पिछड़े दलित आदिवासियों के साथ सरकारी म हकमा पूरी तरह भेदभाव अपनाये हुए है जब के झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार बनाने और भाजपा सरकार को उखाड़ फेकने में इन्हीं समाज का अहम किरदार रहा है! यह बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्र समिति के सदस्य मधुपुर नगर परिषद के उपाध्यक्ष  जियाउल हक ( टारजन) ने पत्रकारों से कहा उन्होंने कहा इस समय अल्पसंख्यक .दलित .आदिवासी .और पिछले दबे कुचले समाज के लोगों की हालत बद से बदतर है उन्होंने कहा एक तरफ कोरोना महामारी ने सभी को बेरोजगार बनाकर रख दिया है पूरी तरह से काम काज ठप पड़ा हुआ है मजदूर अपने घरों में बेकार  पढ़े  हुए हैं दूसरी तरफ सरकारी महकमा की गलत रवाइयां बद नीति के कारण यह समाज के लोग परेशान है झारखंड के हेमंत सरकार से पिछले दलित आदिवासी समाज के लोग को बड़ी उम्मीद है के हेमंत सरकार कुछ तो इस समाज के लिए बेहतर करेंगे मगर जब से हेमंत सरकार बनी है इस कोरोना महामारी ने हेमंत सरकार को उलझा कर रख दिया है यही कारण है कि सरकार की तरफ से कुछ सोच कर भी नहीं हो पा रहा है दूसरी तरफ केंद्र के मोदी सरकार  ने भी झारखंड सरकार की साथ भेदभाव नाइंसाफी कर रहे हैं जबकि झारखंड एक पिछड़ा प्रदेश है यह आदिवासी पिछड़ा बहुल प्रदेश है केंद्र सरकार को चाहिए कि इस प्रदेश पर खास ध्यान दे और अलग से पैकेज देकर  यहां के आदिवासी दलित पिछड़ा अल्पसंख्यक के  जीवन बेहतर बनाएं! उन्होंने कहा कि अगर इन दबे कुचले की आवाज कोई उठाता है तो साजिश के तहत सरकारी महकमा झूठे मुकदमा कर परेशान करते हैं इसीलिए मैं अपने झारखंड की मजबूत नौजवान मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन का ध्यान इन दबे कुचले आदिवासी दलित अल्पसंख्यक की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूं साथ में इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ  सरकार लगाम कसें जो अपने रवैया को गलत अपनाते हुए सरकार को बदनाम करना चाहता है साथ में मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि ऐसे समाज के लिए ऐसी योजनाएं बनाए ताकि इनकी बेरोजगारी दूर हो सके और अपने बाल बच्चों के साथ बेहतर जिंदगी गुजार सके और पलाइन रुके!

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