बांका के बम विस्फोट में मरे मस्जिद के इमाम का शव सारठ पहुंचते ही कालीजोत गांव में पसरा सन्नाटा



सारठ : मंगलवार को बिहार के बांका जिले के सदर थाना क्षेत्र के चांदन नदी तट के किनारे बसे चमरेली नवटोलिया गांव स्थित मदरसा में हुए बम धमाके में मरे नूरी इस्लाम मस्जिद के इमाम अब्दुल मोबिन का शव बुधवार को उनका पैतृक गांव सारठ थाना क्षेत्र का कालीजोत पहुंचा। हालांकि मदरसा में विस्फोट होने की घटना इमाम की मौत की खबर गांव में पहले आ चुका था, फिर भी शव के गांव पहुचते ही पूरे गांव में मातम छा गया था। वहीं उसके बच्चे, पत्नी, माता-पिता और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। परिजनों ने बताया कि लगभग 10 वर्षों से मृतक उसी मस्जिद में रहते थे और अपने अच्छे स्वभाव के कारण अपने धर्म के साथ दूसरे धर्म के लोगो के भी चहेते थे। उनकी किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी। फिर भी अकस्मात इस प्रकार की घटना से पूरा परिवार मर्माहत है। परिजनों ने बताया कि वह अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ व्यक्ति था। मृतक की पत्नी खुशबू खातुन ने बताया कि तीन छोट-छोटे बच्चे हैं ,जिनकी उम्र 8वर्ष, 5वर्ष व 3वर्ष है। ऐसे में उनके चले चले जाने से उनके बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा।बताया कि 3 वर्षीय पुत्री खनिज फातमा दिल की बीमारी से ग्रसित है। जिसका ऑपरेशन कराना अति आवश्यक है और उसकी पूरी तैयारी हो चुकी थी। सिर्फ कोरोना महामारी का कहर कम होने का सभी इंतजार कर रहे थे। मृतक अपनी बच्ची के ऑपरेशन के लिए लगभग दो वर्षों से मस्जिद से मिलने वाला तनख्वा घर नहीं लाते थे और उसे वहीं जमा करके रखे थे जो विस्फोट के बाद वहीं रह गया। हालांकि मलवा हटाने के बाद कुछ पैसा मिल गया है परन्तु उतने कम पैसे से बच्ची के दिल का ऑपरेशन संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें अब किसी मसीहा का इंतजार है जो उसकी बच्ची को नई जिंदगी दे।



मौके पर पहुंचे स्थानीय मुखिया जरजिस अंसारी ने परिजनों को ढाढस देते हुए हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। साथ ही परिजनों ने इस विकट परिस्थिति में भी अन्य स्थानीय प्रतिनिधि के नहीं पहुँचने पर खेद भी जताया।

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