कोरोना महामारी काल में सुस्त व्यवसाय के कारण होल्डिंग वसूली में अपेक्षाकृत लचीला रुख अपनाये निगम - चैम्बर



कोरोना महामारी और लॉक डाउन के कारण लगभग डेढ़ वर्षों से प्रायः सबके व्यापार की स्थिति प्रभावित होकर काफी सुस्त सी हो गई है। धार्मिक नगरी देवघर का अधिकांश व्यवसाय बाबा मंदिर पर निर्भर होता है और डेढ़ वर्षों से मंदिर खुलने की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में देवघर नगर निगम प्रशासन द्वारा राजस्व वसूली में सख्ती और सार्वजनिक मानहानि जैसे दबाव देने की नीति निन्दनीय है। फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संप क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक मल्लिक ने निगम के हवाले से 12 जून को प्रकाशित इस आशय की खबर पर अपनी प्रतिक्रिया दिया। उन्होंने आगे बताया कि यह ठीक है कि निगम को अपने बकाये की राशि वसूलने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसमें सामान्य शिष्टाचार और पर्याप्त सहयोग की भावनाओं का भी ख्याल होना चाहिए। यह समय एक आपदा का समय है और कमोबेश हर लोगों की आमदनी प्रभावित हुई है और होटल, विवाह भवन तथा लॉजिंग बिज़नेस तो बुरी तरह लड़खड़ाई हुई है। इन स्थितियों में विलफुल डिफॉल्टर बहुत कम ही लोग होंगे। एक तरफ जहां हम इस आपदा काल में प्रशासन से कुछ छूट और वसूली की समय सीमा बढ़ाने की अपेक्षा रखते हैं, वहीं प्रशासन और उसकी एजेंसी अनर्गल दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। जैसे निगम लक्ष्य से कम राजस्व संग्रहण से चिंतित है, वैसे ही व्यवसायी इस महामारी में अभूतपूर्व संकट और गिरते आमदनी से परेशान है तथा साथ ही अपने प्रतिष्ठानों के कामगारों को बंदी और सुस्ती के बावजूद मानदेय दे रही है।

अतः अपेक्षा की जाती है कि निगम प्रशासन होल्डिंग वसूली में जरूरी रियायत तथा समय सीमा बढ़ाने का विचार करे। बकायेदारों के घर बैंड-बाजा बजाने जैसे ऊलजलूल कदम न उठाए और व्यवहारिकता पर ध्यान दे। 

क्षेत्रीय उपाध्यक्ष  मल्लिक ने कहा है कि निगम के एजेंसी एसपीएस के अधिकारी विपिन कुमार के हवाले से प्रकाशित ऐसे बयान पर चैम्बर की सख्त आपत्ति है। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त से अपेक्षा की जाती है कि निगम के एजेंसी और उसके अधिकारियों द्वारा अनर्गल बयानबाजी और निगमवासियों से अनुचित व्यवहार पर सख्त कदम उठाकर रोक लगायी जाएगी।

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