भाजपा नगर अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की।



देवघर- कोरोन महामारी में जिस प्रकार से केंद्र सरकार गरीबों के हित में खाद्य वितरण करवाने का प्रयास करते हुए सरकारी राशन दुकानदारों के माध्यम से प्रत्येक घरों में अनाज पहुँचवाना चाह रही है। इससे प्रतीत होता है कि  केंद्र की नरेंद्र मोदी जी की सरकार गरीबों के लिए छोटी से छोटी आवश्यकताओं से लेकर  अनिवार्य आवश्यकताओं तक की  पूर्ति हेतु सतत प्रयत्नशील है । इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए झारखंड सरकार भी कार्य करना चाह रही है ,परंतु केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मिलने वाले राशन दुकानदारों के माध्यम से अनाज को जिस प्रकार से राशन दुकानदार , दुकानदार निरीक्षकों और निरीक्षकों के बड़े अफसरों द्वारा मिल बांट कर  खाता भर के बांट लिया जा रहा है तथा इसकी शिकायत आए दिन प्राप्त हो रही है । इस संबंध में  झारखंड सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की ना तो समुचित व्यवस्था की गई है और ना ही सरकार द्वारा निर्गत हेल्पलाइन नंबर पर भी जनता के शिकायतों का किसी भी प्रकार से निदान किया जाता है। मात्र कुछ दिखावे के शिकायतों का निदान कर सरकार और उनके अधिकारी उसका विज्ञापन करते हैं , परंतु जमीनी हकीकत यह है कि सामान्य जनता को मिलने वाला अनाज आज भी अफसरों का ही पेट भर रही है । झारखंड में आज भी गरीबी और अशिक्षा का आलम है। इसी का फायदा उठाकर राशन दुकानदार, निरीक्षक और इनके ऊपर के अधिकारी जनता से बदतमीजी से बात करते हैं । जनता के ऊपर मामला दर्ज करा देते हैं और किसी भी प्रकार के शिकायतों का निदान नहीं कर जनता को डराने का काम कर रहे हैं । भारतीय जनता पार्टी -देवघर नगर कोरोना काल में किए जा रहे ऐसे भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाने की मांग झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री श्रीमान हेमंत सोरेन जी तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से करती है । अभी जिस प्रकार से सरकारें गरीबों के घरों में चूल्हा जलाने हेतु राशन दे रही है उस राशन को गरीबों के घर तक पहुंचा कि नहीं पहुंचा ? राशन कितनी मात्रा में पहुंचा ? इसके हेतु भी एक पंचायत/वार्ड लेवल की कमेटी गठित कर जांच करवाने की कृपा करें ताकि हमारी जनता भुख से ना मरे और ना ही भूख में अपना और अपने परिवार का पालन करने को मजबूर हो । झारखंड सरकार के मुखिया श्रीमान हेमंत सोरेन जी यदि आप और कुछ नहीं कर सकते हैं , तो इतना तो कर ही सकते हैं की जनता को खाने का अनाज और पीने का पानी उपलब्ध करवा दें । जिस प्रकार से आपने अपने अफसरों और मंत्रियों को सुविधाएं दी है ,उससे झारखंड अब गरीबी रेखा में दिखने वाला राज्य प्रतीत नहीं होता है और फिर भी यदि यहां के लोगों का राशन आप के मंत्री और अधिकारी खा जाएं तो यह आपके लिए बहुत ही शर्मिंदगी वाली बात है। आपको राशन दुकानदारों पर सख्ती दिखाते हुए जनता को दिया जाने वाला अनाज उपलब्ध हो इस पर त्वरित और समुचित कार्यवाही करनी ही चाहिए ।

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