लोगों को दिग्भ्रमित करने के लिए भाजपा का खेतों में प्रदर्शन- कांग्रेस मुन्नम संजय।



देवघर- भारतीय जनता पार्टी ने किसानों को लेकर आज किए गए प्रदर्शन पर देवघर जिला कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की और इसे तथ्यहीन एवं निरर्थक करार दिया। जिलाध्यक्ष मुन्नम संजय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी चंद पूंजीपतियों के हित में काम करने वाली मजदूर किसान विरोधी सरकार है। किसानों के हितों को गर्त में पहुंचा कर, उन्हें गंभीर जख्म देकर आज घड़ियाली आंसू बहा रही है। अगर इन्हें किसानों के प्रति इतनी हमदर्दी है तो साल भर से दिल्ली के सरहदों पर बैठे लाखों किसानों पर ध्यान नहीं जाता।  कंपकंपाती ठंढ, शीतलहर, बर्फबारी, भारी आंधी तूफान वर्षा एवं चिलचिलाती धूप में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत अन्नदाताओं की बेपरवाह नहीं करते। उनकी शहादतों को अनदेखी नहीं करते और उनके द्वारा मांगे गए मांग को मान कर किसान विरोधी तीन काले कानून को वापस ले लेते। अगर किसानों के प्रति हमदर्दी होती तो फसल बीमा का भुगतान कराऐ होते। किसानों को ऋण के बोझ तले दबने नहीं देते। उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर नहीं होना पड़ता। आज उनके लिए नई योजनाएं और नई नीतियां लाने का काम करते। आज का यह नौटंकी बाजी वाला धरना प्रदर्शन देश के लोगों को दिग्भ्रमित कर उनका ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। चुंकी जगजाहिर है कि देश जब कोरोना जैसे महामारी में फंसा था और देश के मोदी सरकार अपने पार्टी की जीत दिलाने के लिए चुनावी दंगल में फंसे थे। लोग अपने परिजनों के लिए उचित ईलाज, दवाई और ऑक्सीजन के लिए दरबदर भटक रहे थे। अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहा था। श्मशानघाट में अंतिम संस्कार के लिए लंबी लाइनें लगानी पड़ रही थी। असंख्य लाशें गंगा में तैर रही थी। पूरे देश में मातम सा फैला था। टीकाकरण नीति में पूर्ण रूप से विफल हो गई। ऐसे में केंद्र सरकार एक अपाहिज की तरह चुपचाप बैठी रही। इन सारी विफलताओं को छुपाने के लिए लोगों और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह आंदोलन छल पूर्वक दिखावा के लिए किया जा रहा है। इस आपदा की घड़ी में राज्य की हेमंत सरकार और कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने किसानों के हित के लिए मसीहा बनकर हर एक महत्वपूर्ण कदम उठाऐ और आज उनका 50 हजार तक का कृषि ऋण माफ कर उन्हें खुशियां दी, उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाया। कैलेंडर तय करते हुए समय सीमा पर लोगों के खेतों तक खाद बीज पहुंचाने का काम किया। सरकार ने जरूरतमंदों को राशन कार्ड मुहैया कराई। राज्य सरकार की जनहित में ऐसे कार्यों के देख कर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के पेट में दर्द उठ गया है। आज जिन मुद्दों को लेकर दिखावे का आंदोलन कर रहे हैं।उस संबंध में बताना चाहता हूं कि 2020 -21 के धान अधिप्राप्ति योजना तहत खरीफ विपणन मौसम 2020-21में झारखंड राज्य खाद्य निगम(JSFC)द्वारा राज्य के 21 जिले में तथा भारतीय खाद्य निगम(FCI) द्वारा राज्य के 3 जिलों में धान अधिप्राप्ति का कार्य किया गया है। इस प्रकार से राज्य खाद्य निगम का लक्ष्य 44,85,000 क्विं. के विरुद्ध 46,01,039 क्वि.एवं भारतीय खाद्य निगम का लक्ष्य 16,000,00 क्विं. के विरुद्ध 16,40,682 क्विं. धान की अधिप्राप्ति की गई। जो कुल लक्ष्य 60,85,000 क्विं.के विरुद्ध में 62,41,722 क्विं. धान की अधिप्राप्ति कर ली गई। जो कुल निर्धारित लक्ष्य का 102 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष धान की खरीदारी अधिक हुई है। धान अधिप्राप्ति के पश्चात किसानों का कुल भुगतान 943.21करोड़ में से अब तक 570 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। शेष 373.21करोड़ भुगतान लंबित है। जैसे-जैसे भारतीय खाद्य निगम द्वारा राशि प्राप्त हो रही है। उसे जिला को भुगतान हेतु उपलब्ध करा करा दी जाती है। धान अधिप्राप्ति के पश्चात राइस मिलों द्वारा अधिप्राप्त धान का मिलिंग कर तैयार चावल भारतीय खाद्य निगम को उपलब्ध करा देती है। तदुपरांत जिला स्तर पर विपत्र तैयार कर भारतीय खाद्य निगम को भुगतान हेतु भेज दी जाती है। वर्तमान में 172 करोड़ भारतीय खाद्य निगम के पास भुगतान लंबित रहने या विलंब से होने के कारण किसानों के भुगतान पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। राशि प्राप्त हो जाने से अब तक 570 करोड़ के बजाय 742 करोड़ का भुगतान हो गया होता। 

राज्य के पूर्ववर्ती सरकार के समय KMS 2017-18 एवं 2018-19 में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य दोनों वर्ष के लिए अलग-अलग 40,00000 क्विं. का था। जिसमें से 21,33,965 क्विं. एवं 22,74,044 क्विं. ही धान की अधिप्राप्ति हो सकी। जो कुल लक्ष्य का क्रमशः 53% एवं 58% ही रहा।  KMS 2020 -21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य के 50% राशि का भुगतान प्रावधान के अनुरूप धान अधिप्राप्ति के समय ही कर दिया गया है।

ऐसे में यह धरना प्रदर्शन अपनी भाजपा अपने पूर्ववर्ती राज्य सरकार तथा वर्तमान में केन्द्र सरकार  की विफलता तथा किसान विरोधी निति को छुपाने के लिए किया जा रहा है, जो निन्दनीय है।

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