कोरोना से लड़ाई में हांफ रहा है देवघर का जिला अस्पताल



देवघर तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के साथ ही देवघर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर जगजाहिर हो गई है. अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर तथा रेमडेसिविर जैसी जरूरी दवा को लेकर हाहाकार मचा है. देवघर में कोरोना संक्रमण की स्थिति दिनों-दिन भयावह होती जा रही है.  लेकिन लाँकडाउन के बजह से हालत कुछ सुधरा है  लाँकडाउन के पहले  महज दस  दिनो में जिले में कोविड के मामले लगभग दस  गुणा बढ़ गए थे  जिले में प्रतिदिन कोरोना के 500 सौ लगभग मामले सामने आ रहे थे. स्थिति की भयावहता का आकलन संक्रमण दर की लगातार बढ़ती स्थिति से किया जा सकता है,  स्थिति बिगड़ते ही सरकारी तथा प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी और इसी के साथ सरकारी दावों के पोल भी खुलने लगे. देखते ही देखते अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर तथा रेमडेसिविर उपलब्ध नहीं के बोर्ड टंग गए. संक्रमण के तेजी से फैलने तथा जिले भर से मरीजों के आने के कारण  सदर अस्पताल  कोविड वॉर्ड पूरी तरह भर गए. यही हाल देवघर  के प्राइवेट अस्पतालों का भी हो गया  सरकारी अस्पतालों में तो ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों को इसकी किल्लत झेलनी पड़ रही है. इस वजह से वे मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर रहे हैं. 

कई ऐसे प्राइवेट अस्पताल हैं जिन्होंने मरीज को भर्ती तो कर लिया किंतु उनके पास भी ऑक्सीजन की कमी के कारण उन मरीजों को रखना भारी पड़ रहा था आज भी जिले की  स्वास्थ्य सेवाओं का काफी बुरा हाल है. यहां के लोगों को स्वास्थ्य के मामले में अन्य राज्यों और शहरों में पलायन करना पड़ता है. मामूली बीमारी में भी लोगों को दूसरे शहरों की ओर रुख करना मजबूरी है. कोरोना काल में हालात बद से बदतर हो गये हैं. ग्रामीण स्तर पर एक भी चिकित्सक नही है. ऐसे में लोग पूरी तरह से देहाती चिकित्सकों पर निर्भर है. जिले में चिकित्सकों की कमी से भारी परेशानी हो रही है. सरकार चिकित्सकों की बहाली तो कर रही है, लेकिन स्वीकृत पद से काफी कम संख्या में बहाली हो रही है.

झारखंड राज्य अलग होने के बाद उम्मीद थी की व्यवस्था में सुधार होगा. लेकिन अभी तक बदलाव नहीं दिख रहा है. लोगों को सबसे ज्यादा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव होने की उम्मीदें थीं. क्योंकि देवघर जिला स्वास्थ्य के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. लेकिन राज्य बनने के इतने दिनों बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव न होने से लोगों के मन में आक्रोश है. 

लेकिन एक सुखद खबर है कि एम्स का निर्माण हो रहा है

लोगों ने कहा कि राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी चीजों में सुधार की उम्मीद थी. लेकिन मंत्री, नेताओं की जानकारी में देने के बाद भी हालात ज्यों के त्यों है.

एक मात्र सदर अस्पताल जिसमे चिकित्सकों  अभाव है

लोगों का कहना है कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल करोड़ों ख़र्च कर इसका बिल्डिंग बनाया गया है सरकार ने करोड़ों की मशीने भी भेजी. लेकिन सरकार एवं विभाग की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण अस्पताल में चिकित्सक की कमी है 

 लोगों को मशीनों का जरा भी लाभ नही मिला. कई मशीनों में जंग लग गया है. लेकिन किसी ने भी सुध तक नही लिया.

जिले में चल रहे है सेकड़ो से अधिक अवैध नर्सिंग होम, जाँच घर

 

मौत का सौदा कर रहे अवैध नर्सिंग होम

शहर में दो दर्जन से अधिक नर्सिंग होम अभी भी अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। गरीबों का शोषण कर दलाल मरीजों को इस महामारी में अपने जाल में फंसा कर निजी अस्पतालों में ले जा रहे हैं और उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं। जिससे गरीबों का आर्थिक रूप से तो काफी नुकसान हो ही रहा है, जान भी गंवानी पड़ रही है।

पंद्रह दिन के अंदर जिला मुख्यालय पर तीन अस्पतालों की करतूत सामने आई और विभाग ने कार्रवाई की नही इसका साक्ष्य नहीं है देवघर में सरकारी अस्पताल की दवाओं से प्राइवेट मरीजों को भर्ती कर अप्रशिक्षित डाक्टरों से इलाज किया जा रहा है यहां सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को अपने जाल में फांस कर अस्पताल में ले जाते है ऐसे कई कारनामा सामने आया रहा है 

 हर रोज गरीबों की जान से खेलने का कार्य हो रहा है। मरीजों की जान के साथ हर रोज अवैध रूप से चल रहे ये अस्पताल खेल रहे है

अवैध रूप से चोरी छिपे जो भी प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं  वह सभी रात को इस महामारी मे नाला मे सारी गंदगी वहा देते है जिससे महामारी फैलने की दावत दी जा रही है जबकि 2000 15 16 में हॉस्पिटल के कचरे को डिस्टर्ब करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर सरकार ने इंसीनरेटर मशीन पुराने सदर हॉस्पिटल में लगाया गया था जिसकी आज अस्थि पंजर भी नजर नहीं है साथ ही साथ जिले में चल रहे रजिस्टर्ड पैथोलैब नर्सिंग होम से जो कचरा रूई, बैंडेज, नीडल, सुई, डिस्पोज करने का टैक्स भी लिया जाता है लेकिन यह कहावत यहां सत्य साबित होता है सब धन 22 पसेरी। सभी कचड़े को कभी नाली में तो कभी नगर निगम के कूड़ा दानी में डाल दिया जाता है

क्या कहते हैं- सिविल सर्जन डॉक्टर जुगल चौधरी

पूछे जाने पर उन्होंने कहा अभी ऐसा कोई भी नर्सिंग होम या पैथोलैब नहीं चल रहा है हमने सारे बंद करवा दिए हैं सभी को दिशा निर्देश दिया गया है पहले रजिस्ट्रेशन कराएं फिर चालू किया जाएगा इतना ही नहीं उन्होंने कहा डिस्ट्रॉय करने के लिए धनबाद की एक कंपनी है जिसके साथ हमारा एग्रीमेंट है जो यहां से सारे नर्सिंग होम और पैथोलैब का  का मलवा धनबाद ले जाते हैं और वहां इंसुनेटर में डिस्टोज किया जाता है

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