सखी मंडल से जुड़ने के बाद महिलाएं बनी आत्मनिर्भर।



कुंडहित (जामताड़ा): सखी मंडल से  जुड़ने के बाद बनी महिलाएं आत्मनिर्भर । सखी मंडल से  जुड़ने के बाद  प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर  महिलाएं आत्मनिर्भर एवं  सशक्तिकरण बन रही है। आपको बताते चले कि कुंडहित  प्रखंड के बाघाशोला गांव की रहने वाली लाइलोनिहार बीबी  जो सखी मंडल से जुड़ने से पहले एक गृहणी महिला थी। पहली बार जब 2016 में सखी मंडल से जुड़ने के बाद उसका चयन एक सक्रिय महिला के रूप में हुआ। जिसमें सक्रिय महिला के तौर पर 1500₹भत्ता हर महीना मिलता है । धीरे धीरे  लाइलोनिहार बीबी बचत करने भी  सिख ली।वह बताती हैं कि ऋण लेकर अभी अपना बड़ा सा किराना स्टोर चला रही है । जिसमे उसका प्रतिदिन ₹500 आमदनी होता है ।जिससे उसका परिवार भली भांति चल जाती है।लाइलोनिहार बीबी  ने बताया कि 2016 में हम लोग सखी मंडल में जुड़े थे और आज तक जुड़े हुए हैं। सखी मंडल से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है,सशक्तिकरण  मिला है और आत्मनिर्भर बनने का जरिया मिला। सखी मंडल में जुड़ने के बाद बड़े से बड़े व्यवसायदार बन सकते हैं ।उन्होने यह भी कहा कि समूह में जुड़ने के बाद एक सक्रिय महिला बनी जिसमें मुझे हर महीने 1500 रुपया भत्ता मिलता है ।उसके बाद फिर मैं समूह से ऋण लेकर एक किराना दुकान खोली जो अच्छा खासा चलता है ,अभी हर दिन ₹500 दुकान से  आमदनी हो जाती है।जिससे अच्छा खासा दिन गुजर रहा है ।पहले हमलोगो को बचत करने का तरीका मालूम नहीं था। सखी मंडल से जुड़ने के बाद बचत करने का तरीका, ऋण लेनदेन, सरकारी योजनाओं  आदि के  बारे में जानकारी मिल रही है ।

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