अनुबंध कर्मियों के जूमएप्प की बैठक में लिए गए निर्णय



 देवघर झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ ,झारखण्ड  के केंद्रीय संयुक्त सचिव झारखण्ड ने सरकार से अनुरोध किया कि राज्य के समस्त अल्प मानदेय भोगी अनुबंध कर्मियों को कोई भी टारगेट देने के पहले उसे पूरा करने के लिए उपलब्ध संसाधनों ,समस्याओं और परेशानियों पर भी गौर करें सरकार ।कोविड 19 के कारण अघोषित रुप से महंगाई बढ़ी है ,दवा ,आवागमन खाद्यान्न और जरूरत मंद की चीजें आसमान छू रही है और अनुबंध कर्मियों का मानदेय वर्ष 2000ई के  निर्धारितदर पर ही दिया जा रहा है ।एक मे तो मानदेय कम है ऊपर से 4-5 महीना विलम्ब से मिलने के कारण अनुबंध कर्मियों में भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है ,काम का बोझ ,अघोषित भय ,औऱ आर्थिक तंगी  के कारण कई अनुबन्ध कर्मी कोरोना संक्रमित हो गए ,कई लोगो की जान चली गई ।अनुबन्ध कर्मियो को जीने लायक वेतन दिए बिना अनावश्यक दबाब से अनुबन्ध कर्मियो का स्वस्थ्य प्रभावित हो रहा है ।

इस लिए सरकार को इनके दायित्व के साथ अधिकार भी शतप्रतिशत दें ताकि ये फ्री हो कर काम कर सके ।

मनरेगाकर्मियों कर्मियों क साथ हुए समझौते को लागू करने के बाद ही कोई निदेश दें सरकार :महेश सोरेन ,प्रदेश उपाध्यक्ष ,झारखण्ड राज्य  मनरेगा  कर्मचारी संघ झारखण्ड ने कहा कि मनरेगा कर्मियों का हड़ताल अवधि में हुए समझौते आज 8 महीने बाद भी लागू नही हुआ औऱ फिर वर्क प्रेशर शुरू करना उचित नही है ।हमने पिछले वितीय वर्ष में भी लक्ष्य से ज्यादा काम किया मगर हमे कुछ नही मिला ,उल्टे हमारे लोगों की  जब असामयिक मृत्यु होती है तो उन्हें एक फूटी कौड़ी नही मिलती है ।सरकर काम करने वालो के भविष्य पर भी ध्यान दें केवल टारगेट नही थोपें ।

50  हजार उठाने वाले घर मे  और 10 हजारमानदेय उठाने  वाले अनुबन्ध कर्मी क्षेत्र में नही चलेगा।

डॉ राजेश दास ,प्रदेश सचिव ,झारखण्ड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ झारखण्ड ने कहा कि 

हम लोगों को मजदूरों के प्रति सहानुभूति है ,पर जान गवां कर इस संक्रमण काल मे काम करना मुश्किल है ,सरकार को चाहिए कि मनरेगा कर्मियों को पर्याप्त सुविधा दे ताकि भय मुक्त काम किया जा सके।साथ ही भीभिन्न प्रखंडों में 4-5माह से लंबित मानदेय को भुकतान करने की बात कहें ताकि इस कोरणा काल में कर्मी दवाई सहित इलाज सही तरीके से कर सकें। 

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