निशिकांत दुबे को ज्ञान की घोर कमी है-फुरकान अंसारी



मधुपुर गोड्डा लोकसभा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि झारखंड के मजबूत मुख्यमंत्री का ही प्रयास है कि आज अन्य राज्यों की तुलना में कोरोना मरीजों की संख्या और मृत्यु दर सबसे कम है। मरीजों को बचाने के लिए उचित इलाज के क्रम में कुछ कि मृत्यु हो गया है परंतु सरकार की ओर से भरपूर कोशिश किया गया जो सराहनीय है। आगे पूर्व सांसद ने कहा की गोड्डा सांसद का कफन के बारे में जो बयान आया है वो बहुत ही शर्मनाक है। उन्हें ज्ञान की घोर कमी है।ऑक्सीजन और वैक्सीन की आपूर्ति भारत सरकार को करनी है जो अपर्याप्त है परंतु राज्य सरकार अपने कोष से अभी तक दवा ऑक्सीजन और वैक्सीन की कोई कमी नहीं होने दे रही है जो सराहनीय प्रयास है।श्री निशिकांत दुबे को पता होना चाहिए की कोरोना में मृत शरीर को समाज तो दूर अपना बेटा और परिवार भी दाह संस्कार करने को तैयार नहीं हो रहा है।कंधा देने वाले भी नहीं मिलते हैं। ऐसी कई घटनाएं प्रकाश मे आयी है। कांग्रेस के लोगों ने कई एक लाश को कंधा देकर शमशान तक पहुंचाया और दाह संस्कार भी कराया है।अन्य राज्यों से भी इस प्रकार की सूचनाएं मिल रही होगी।लोग इस महामारी से इतना भयभीत हैं कि अपने जान के सामने सारे रिश्ते समाप्त हो गया है।आगे पूर्व सांसद ने कहा की सनातन धर्म और भारत की परंपरा एवं संस्कृति तो सही है परंतु इस हालात को मानता कौन है।गंगा के दोनों छोरों में हजारों लाशें बिना कफन का पड़ा हुआ है। क्या दुबे को इसकी जानकारी नहीं है? मेरी सलाह है कि निशिकांत दुबे संस्कार की बात नहीं करें और हकीकत को समझें।अथक प्रयास के बाद जिस गरीब को नहीं बचाया जा सका है उसे उठाने को परिजन भी तैयार नहीं है। उसे कफन और लकड़ी देकर श्मशान घाट पहुंचा देना और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना राज्य सरकार का सराहनीय कदम है।बीजेपी वालों को मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहिए।अखबारों में बयानबाजी करने का श्री दुबे को महारत हासिल है!

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