सत्यजित राय के बिना सिनेमा जगत वैसा ही है जैसे सूरज-चाँद के बिना आसमान : डॉ. प्रदीप



देवघर  : फ़िल्म निर्माता-निर्देशक, गीतकार, साहित्यकार और चित्रकार सत्यजित राय की जयंती आज सिने जगत में श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। स्थानीय ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा- सत्यजित राय का जन्म आज ही के दिन 2 मई, 1921 को हुआ था जो बीसवीं शताब्दी के विश्व की महानतम फ़िल्मी हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने यथार्थवादी धारा की फ़िल्मों को नई दिशा देने के अलावा साहित्य, चित्रकला जैसी अन्य विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वे प्रमुख रूप से फ़िल्मों में निर्देशक के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन लेखक और साहित्यकार के रूप में भी उन्होंने उल्लेखनीय में ख्याति अर्जित की है। वे फ़िल्म निर्माण से संबंधित कई काम ख़ुद ही करते थे। इनमें निर्देशन, छायांकन, पटकथा, पार्श्व संगीत, कला निर्देशन, संपादन आदि शामिल हैं। फ़िल्मकार के अलावा वह कहानीकार, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे। वे कथानक लिखने को निर्देशन का अभिन्न अंग मानते थे।उन्होंने अपने जीवन में 37 फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं। इनकी पहली फ़िल्म 'पाथेर पांचाली' को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। विश्व में भारतीय फ़िल्मों को नई पहचान दिलाने वाले सत्यजित राय भारत रत्न के अतिरिक्त पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित हैं। विश्व सिनेमा में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हेंं मानद 'ऑस्कर अवॉर्ड' से अलंकृत किया। इसके अलावा उन्होंने और उनके काम ने कुल 32 राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त किये। उनके बिना सिनेमा जगत वैसा ही है जैसे सूरज-चाँद के बिना आसमान। डॉ. देव ने आगे जानकारी दी कि इस पूरे वर्ष उनकी जन्मशती पर विद्यार्थियों के बीच उनसे सम्बंधित निबंध, चित्रांकन व अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन ओमसत्यम इंस्टीट्यूट एवं विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के युग्म बैनर तले पूरे देश में होगा।

No comments