आर्थिक तंगी के चलते भुखमरी के कगार पर प्राइवेट शिक्षक : दिनेश नाथ



देवघर।कोरोना महामारी के प्रकोप से कोई अछूता नहीं है जबकि कोरोना से अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है तो वह है शिक्षक वर्ग ऐसा कहना है दिनेश नाथ खवाडे का जो कि पेशे से एक प्राइवेट शिक्षक हैं मौके पर उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को लेकर सभी वर्ग के लोग परेशान हैं। सरकार ने उद्योग धंधों के संचालन के लिए गाइडलाइन के तहत अनुमति भी दिया था वहीं प्राईवेट स्कूल व कोचिंग सेंटर में बच्चों को पढ़ाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले प्राईवेट शिक्षकों के लिए अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। विगत 14 महीनों से घर में बैंठे प्राईवेट शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है । जिससे उनकी स्थिति काफी दयनीय हो गई है विद्यालय बंद होने और कोचिंग संचालन की अनुमति न मिलने से प्राईवेट शिक्षक परेशान हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर मार्च माह में स्कूल व कॉलेज बंद कर दिए गए।तब से लेकर आज तक प्राईवेट शिक्षक घर में निकम्मे होकर बैठ गए है।वहीं 14 महीने बीत जाने के बाद भी स्कूलों के खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि कोचिंग का संचालन भी बंद है। ऐसे में कोचिंग में बच्चों को पढ़ाकर परिवार चलाने वाले प्राईवेट शिक्षक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। उनकी आर्थिक स्थिति चरमराने के पश्चात कोई सामाजिक संस्था उनकी कोई खोज खबर लेने अब तक आगे नहीं आयी है ।यहाँ तक की कोई शासन-प्रशासन के द्वारा भी कोई मदद अबतक नहीं दी गई है। अन्य रोजगार के क्षेत्र में तो गाइड लाइन जारी की गई ।लेकिन बेरोजगार शिक्षकों के जीविकोपार्जन के लिए कोई मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ। जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की बदहाली के प्रति केंद्र व राज्य सरकारें भी संवेदनशील नहीं हैं।संकट के इस समय में सरकारें प्राय:सबके लिए कुछ न कुछ आर्थिक पैकेज की घोषणा कर चुकी हैं। लेकिन निजी स्कूलों के प्रति उनकी कोई सहानुभूति नहीं है।कोरोना के पहले दौर में केंद्र सरकार के सौजन्य से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के द्वारा अनाज का पैकेट दिया गया था लेकिन वह काफी नहीं था कुछ महीनों तक तो स्कूल संचालकों के द्वारा भी सहायता दिया गया लेकिन अब निजी स्कूल संचालक भी पूरी तरह आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रूप से टुट चुके हैं।लॉकडाउन के बाद से स्कूल प्रबंधन अपने छात्र-छात्राओं के लिए ऑनलाइन क्लास के साथ साथ बेहतर शिक्षा के तमाम प्रयास करने में जुटे हैं  बावजूद स्कूलों में अभिभावकों के द्वारा बच्चों की फीस न पहुंचने से शिक्षकों के वेतन पर भी आफत है ।उन्होंने अखबार के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि प्राइवेट शिक्षकों के लिए एक विशेष राहत पैकेज दिया जाए क्योंकि वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि आने वाले कुछ दिनों में स्कूल को खोला जाएगा।ऐसी स्थिति में शिक्षकों का जीना मुहाल हो गया है।उनकी मरणासन्न की स्थिति हो  गई है। सरकार का ध्यान विशेष तौर पर अपेक्षित है।

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